छत्तीसगढ़ में मंत्रियों, नेताओं और वरिष्ठ अधिकारियों को दिए जाने वाले गार्ड ऑफ ऑनर की परंपरा को समाप्त कर दिया गया है। राज्य शासन ने इस संबंध में पूर्व में प्रचलित व्यवस्था में संशोधन करते हुए नई व्यवस्था लागू कर दी है। हालांकि, गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस, शहीद पुलिस स्मृति दिवस, राष्ट्रीय एकता दिवस, राजकीय समारोह और पुलिस दीक्षांत समारोहों में गार्ड ऑफ ऑनर की व्यवस्था पहले की तरह जारी रहेगी। गृह विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, पुलिस बल की कार्यक्षमता बढ़ाने और औपनिवेशिक परंपराओं को समाप्त करने के उद्देश्य से गार्ड ऑफ ऑनर से जुड़े नियमों में संशोधन किया गया है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि प्रोटोकॉल के अनुसार संवैधानिक पदों पर आसीन अतिथियों के लिए यह व्यवस्था यथावत लागू रहेगी। आदेश के तहत राज्य के भीतर सामान्य दौरों, आगमन-प्रस्थान और निरीक्षण के दौरान राज्य के गृहमंत्री, अन्य मंत्रियों, डीजीपी सहित सभी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को जिले में दौरे, भ्रमण या निरीक्षण के समय दिया जाने वाला गार्ड ऑफ ऑनर समाप्त कर दिया गया है। उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा की विशेष पहल पर गृह विभाग ने औपनिवेशिक काल से चली आ रही इस परंपरा की समीक्षा की। समीक्षा के बाद वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप इसमें बदलाव करने के निर्देश जारी किए गए। गृहमंत्री शर्मा ने स्वयं विभागीय अधिकारियों को गार्ड ऑफ ऑनर की मौजूदा व्यवस्था का मूल्यांकन कर आवश्यक संशोधन करने के निर्देश दिए थे। जानिए… कैसे दिया जाता है सम्मान भारत में यह परंपरा ब्रिटिश शासन के दौरान शुरू हुई। गार्ड ऑफ ऑनर का पैमाना गणमान्य व्यक्ति के पद पर निर्भर करता है। {भारत के राष्ट्रपति को गार्ड ऑफ ऑनर देने के लिए 150 कर्मियों का दल शामिल होता। {इस दल को सेना, नौसेना और वायु सेना से बराबर संख्या में कर्मियों को लेकर बनाया जाता है। {प्रधानमंत्री और उपराष्ट्रपति को 100 कर्मियों का गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाता है। {राज्यपाल, मुख्यमंत्री और बाकी गणमान्य व्यक्तियों को 50 कर्मियों के दल का गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाता है। अब ये होंगे पात्र भारत में गार्ड ऑफ ऑनर उन व्यक्तियों को दिया जाता है, जो संवैधानिक या आधिकारिक रूप से मान्यता प्राप्त पदों पर आसीन होते हैं। इनमें भारत के राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल, मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री शामिल हैं। आधिकारिक यात्राओं के दौरान विदेशी राष्ट्राध्यक्षों या सरकार प्रमुखों-जैसे राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री को भी गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाता है। इसके अलावा वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को कमांड परिवर्तन या सेवानिवृत्ति परेड जैसे महत्वपूर्ण समारोहों में गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाता है। वहीं, सशस्त्र बल, अर्धसैनिक बल और पुलिस कर्मियों को कर्तव्य के दौरान शहादत देने पर उनके बलिदान के सम्मान में गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया जाता है।


