जिस विजय के नाम पर ली गई फर्जी पावर ऑफ अटर्नी, उसने 7 राज्यों में बनाई संपत्ति

विनय चौबे के हजारीबाग में डीसी रहते हुआ था घोटाला हजारीबाग में हुए 2.75 एकड़ खास महाल जमीन घोटाला की जांच कर रही भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) को चौकाने वाली जानकारी मिली है। जिस विजय प्रताप सिंह के नाम पर फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी (पीओए) लेकर उक्त घोटाला किया गया, उसने सात राज्यों में अकूत संपत्ति बनाई है। एसीबी को मिली प्रारंभिक जानकारी में उसने झारखंड में हजारीबाग, जमशेदपुर व रांची के अलावा, दिल्ली, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार में भी अकूत संपत्ति बनाई है। अब एसीबी उसके अन्य राज्यों के संपत्ति की भी जांच में जुट गई है। एक दिन पूर्व ही उसके विरुद्ध इस मामले में विशेष कोर्ट में चार्जशीट दाखिल किया है। जिसमें एसीबी ने कोर्ट को जानकारी दी है कि खास महाल जमीन घोटाला में विजय प्रताप सिंह और उसके पार्टनर सुधीर कुमार सिंह के नाम पर फर्जी पावर ऑफ अटार्नी लिया गया। इसके बाद उक्त जमीन में हेराफेरी की गई। विजय प्रताप को एसीबी ने 6 अक्टूबर को गिरफ्तार किया था। लेकिन उसका दूसरा पार्टनर सुधीर कुमार सिंह अबतक एसीबी के हाथ नहीं लगा है। वर्तमान में विजय प्रताप हजारीबाग केंद्रीय कारा में है। खास महाल जमीन घोटाला तब हुआ था, जब निलंबित आईएएस विनय कुमार चौबे हजारीबाग के डीसी थे। इस मामले में एसीबी ने वर्ष 2015 में पहले पीई दर्ज किया था। एसीबी को अनुसंधान में जानकारी मिली थी कि हजारीबाग की 2.75 एकड़ खास महाल जमीन जिसे 1948 में 30 वर्षों के लिए सेवायत ट्रस्ट को लीज पर दिया गया था। खास महाल जमीन की लीज 1978 में समाप्त हो गई थी और 2008 तक इसका नवीकरण किया गया। लेकिन 2008-10 के बीच एक सुनियोजित षड्यंत्र के तहत इस भूमि को सरकारी भूमि घोषित कर 23 निजी व्यक्तियों को आवंटित कर दिया गया। खास महाल पदाधिकारी के साथ मिलकर लीज नवीनीकरण के लिए दिए गए आवेदन से सेवायत शब्द हटवाया गया। यह सब इसलिए किया गया, ताकि गलत तरीके से खास महाल की जमीन का ​हस्तांतरण किया जा सके। इस मामले में एसीबी ने इस साल अगस्त में प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई शुरू की और कई आरोपियों को गिरफ्तार किया।

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