सतना में सोमवार रात पंजाबी परंपरा और संस्कृति का अद्भुत रंग देखने को मिला, जब लोहड़ी के अवसर पर पूरे शहर में पारंपरिक उत्सव मनाया गया। मकर संक्रांति से एक दिन पहले मनाए जाने वाले इस त्योहार में शहरवासियों ने अलाव जलाकर ठंड से राहत पाई और पंजाबी लोक गीतों की धुन पर जमकर नृत्य किया। ढोल और गीतों पर थिरके लोग पारंपरिक ढोल की थाप पर गिद्दा और भांगड़ा करते हुए बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी ने इस त्योहार का भरपूर आनंद लिया। ‘सुंदरिए-मुंदरिए होय’ जैसे गीतों पर हर कोई झूम उठा। यह त्योहार न केवल खुशियों और उल्लास का प्रतीक है, बल्कि नए मेहमानों के स्वागत और नई शुरुआत का भी संदेश देता है। कड़ाके की ठंड में भी नहीं रुका उत्साह कड़ाके की ठंड के बावजूद लोगों का उत्साह देखते ही बनता था। परिवारों ने मिलकर अलाव के चारों ओर परंपरागत लोहड़ी गीत गाए और एक-दूसरे को मिठाई, मूंगफली, रेवड़ी और उपहार देकर शुभकामनाएं दीं। यादगार बना लोहड़ी का पर्व इस मौके पर लोगों ने अपने प्रियजनों के साथ तस्वीरें खिंचवाईं और इसे यादगार बनाया। पूरा शहर लोहड़ी के रंग में सराबोर नजर आया। हर गली और चौराहे पर पंजाबी संस्कृति की झलक दिखी, जो इस त्योहार को और खास बना रही थी।


