भास्कर न्यूज | बालोद जिले के किसानों को ट्रैक्टर चलित जीरो टिलेज सीड ड्रिल पद्धति से फसल बोआई के लिए कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक प्रोत्साहित कर रहें है। अब तक 27 किसान सहमति दे चुके है। कृषि विज्ञान केंद्र बालोद के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. केआर साहू, वैज्ञानिक गीतेश सिन्हा ने बताया कि यह एक आधुनिक एवं उन्नत कृषि यंत्र है। जिसकी मदद से बिना जुताई किए सीधे खेत में फसल की बुवाई की जा सकती है। यह तकनीक धान की कटाई के तुरंत बाद तिवड़ा की बुवाई के लिए अत्यंत कारगर सिद्ध हुई है। रबी सीजन में इस तकनीक को अपनाने से तिवड़ा फसल में समय की बचत, लागत में कमी और उत्पादन में वृद्धि जैसे कई लाभ होगा। कृषि वैज्ञानिक सिन्हा ने बताया कि इस पद्धति में खेत की पारंपरिक जुताई की आवश्यकता नहीं होती। धान की कटाई के बाद उपलब्ध अवशिष्ट नमी का उपयोग करके सीधे बुवाई कर दी जाती है। जिससे अंकुरण बेहतर होता है और फसल जल्दी स्थापित होती है। कृषि विज्ञान केंद्र के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. केआर. साहू के अनुसार इस पद्धति से जुताई न करने से ट्रैक्टर, डीजल तथा मजदूरी में होने वाली खर्च की बचत होती है। जिससे लागत राशि घटती है। इसके अलावा मिट्टी की ऊपरी संरचना सुरक्षित रहने से मृदा की उर्वरता, जैविक पदार्थ और नमी संरक्षण में सुधार होता है। साथ ही मिट्टी का कटाव रुकता है, जल बहाव कम होता है और खेत में नमी लंबे समय तक बनी रहती है। धान की पराली हटाने या जलाने की आवश्यकता नहीं होती, जिससे पर्यावरण को भी नुकसान नहीं पहुंचता। खेत में अवशेष बने रहने से मिट्टी में पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ती है और सिंचाई की जरूरत घटती है, जिससे जल उपयोग दक्षता में वृद्धि होती है। इस प्रकार इस तकनीक को अपनाना किसानों के लिए समय, श्रम, ईंधन और लागत सभी की बचत करने वाला सरल, व्यवहारिक और टिकाऊ समाधान बन सकता है। कृषि विज्ञान केंद्र के अनुसार इस पद्धति से जुताई की आवश्यकता समाप्त। उत्पादन में 16-20% तक वृद्धि। परीक्षण के दौरान शामिल किसानों ने बताया कि जीरो टिलेज मशीन से धान कटते ही तिवड़ा की बुवाई सरल, तेज और कम लागत में हो जाती है।


