झालावाड़ में शीतलहर और कड़ाके की ठंड के बीच कृषि विभाग ने किसानों को फसलों को पाले से बचाने के लिए महत्वपूर्ण सलाह दी है। कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक कैलाशचंद्र मीणा ने किसानों को कई प्रभावी उपाय सुझाए हैं। उन्होंने बताया कि पाले की रात में (रात 12 से 2 बजे) खेत की उत्तरी-पश्चिमी दिशा में कूड़ा-कचरा जलाकर धुआं करना चाहिए। इससे वातावरण का तापमान 4 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ाया जा सकता है। पौधशालाओं और सब्जी की फसलों को टाट, पॉलीथीन या भूसे से ढकना चाहिए। विशेष सुरक्षा के लिए किसान उत्तरी-पश्चिमी दिशा में वायुरोधी टाटियां लगा सकते हैं। नर्सरी और किचन गार्डन में टाटियां दिन में हटा दें और रात में लगा दें। पाले से बचाव के लिए खेत में सिंचाई करना भी प्रभावी उपाय है। नम जमीन में गर्मी अधिक समय तक बनी रहती है और तापमान 0.5 से 2 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ जाता है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, पाले की संभावना वाले दिनों में गंधक के तेजाब के 0.1 प्रतिशत घोल का छिड़काव करना चाहिए। एक हेक्टेयर के लिए एक लीटर गंधक का तेजाब 1000 लीटर पानी में घोलकर प्लास्टिक स्प्रेयर से छिड़काव करें। इसका प्रभाव दो सप्ताह तक रहता है। आवश्यकता पड़ने पर 15 दिन बाद दोबारा छिड़काव किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि सरसों, गेंहू, चना, आलू व मटर जैसी फसलों को पाले से बचाने के लिए गन्धक के तेजाब का छिड़काव करने से न केवल पाले से बचाव होता है, बल्कि पौधों में लोह तत्व की जैविक एवं रासायनिक सक्रियता बढ़ जाती है, जो पौधों में रोग रोधिता बढ़ाने में एवं फसल को जल्दी पकाने में सहायक होती है।


