भास्कर न्यूज | जामताड़ा हर साल मकर संक्रांति के मौके पर करमदहा मेला आयोजित किया जाता है, जो जामताड़ा जिले का एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन है। इस मेले की शुरुआत करीब 400 साल पहले घांटी स्टेट के राजाओं द्वारा की गई थी और यह आज भी अपने प्राचीन महत्व को बनाए हुए है। मकर संक्रांति के दिन, 15 जनवरी 2025 से शुरू होने वाला यह मेला 30 जनवरी तक चलेगा। इस मेले का उद्घाटन जामताड़ा विधायक और राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी करेंगे। मेला कमेटी के अध्यक्ष इलियास अंसारी ने इस संबंध में जानकारी दी। करमदहा मेला अपनी पौराणिक मान्यताओं और ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। यह मेला बाबा दुखिया मन्दिर के प्रांगण में आयोजित किया जाता है, जो क्षेत्र की धार्मिक आस्था का केंद्र है। मकर संक्रांति के दिन श्रद्धालु इस मेला में भाग लेकर पवित्र स्नान करते हैं और बाबा दुखिया के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। इस मेले का आयोजन 17वीं शताब्दी से हो रहा है, जब घांटी राज के राजाओं ने इस मेले की शुरुआत की थी। पौराणिक कथाओं के अनुसार, यह मेला एक समय में राजाओं के मनोरंजन और शिकार क्षेत्र के रूप में प्रसिद्ध था, लेकिन आज यह क्षेत्र धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र बन चुका है। स्थानीय व्यवसाय और मेला का प्रभाव स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले इस इलाके में घना वन क्षेत्र था और राजाओं ने करमदहा को अपने वनभोज और शिकार के लिए चुना था। लेकिन आज यह स्थल धार्मिक और सांस्कृतिक मेलों का आयोजन स्थल बन चुका है। करमदहा मेला न केवल एक धार्मिक आयोजन है, बल्कि स्थानीय व्यापारियों के लिए भी एक महत्वपूर्ण आय का स्रोत है। मेला क्षेत्र में सैकड़ों स्थायी दुकाने लग चुकी हैं। इस बार के मेले में मनोरंजन के कई नए साधन होंगे, जिनमें मौत का कुआं, झूला, ब्रेक डांस, तारामाची, सर्कस, नोका झूला, ड्रैगन, अप्पू घर, मीना बाजार, लोहे और बर्तन की दुकानों के अलावा अन्य कई आकर्षक दुकाने शामिल होंगी। इसके अलावा, सैलानियों के लिए मेला स्थल के आसपास कई होटल और खाने-पीने के विकल्प भी उपलब्ध हैं। गोविंदपुर साहेबगंज स्टेट हाईवे पर स्थित होने के कारण इस मेले में आने वाले पर्यटकों की संख्या हर साल बढ़ रही है, और लोग यहां अपनी धार्मिक आस्था के साथ-साथ मेला का आनंद भी लेते हैं। दुकानों की बढ़ती संख्या से जगह की कमी हर साल की तरह इस बार भी मेला में बड़ी संख्या में दुकानदार हिस्सा लेंगे, लेकिन इस बार दुकानों की बढ़ती संख्या के कारण मेला क्षेत्र में जगह की कमी हो गई है। कुछ दुकानदार तो हटिया प्लॉट की जर्जर अवस्था के बावजूद अपने स्टॉल लगने के लिए मजबूर हैं, जो जोखिम भरा साबित हो सकता है। हालाँकि, इस मेले के आयोजन के कारण स्थानीय अर्थव्यवस्था में भी बढ़ोतरी हो रही है।


