अजमेर में मकर संक्रान्ति का पर्व मनाया गया। इस दौरान लोगों ने पतंग उड़ाए और दान कर पुण्य कमाया। इस दौरान मंदिरों में सजावट की गई और सुबह से दर्शनों के लिए भीड़ लगी रही। सुहागन महिलाओं ने अपने पति के दीर्घायु एवं यशस्वी जीवन की कामना के लिए 13 वस्तुओं का दान करके भगवान सूर्य का पूजन किया। घरों में तिल से बने व्यंजनों की बहार रही। महिलाओं की ओर से भी इस मौके पर कई पारंपरिक कार्य रीति-रिवाज के साथ पूरे किए गए।सुबह से ही शहरवासियों ने दान-पुण्य करने की शुरुआत कर दी। शहरवासियों ने गायों को चारा तथा पक्षियों को दाना डाला। कई शहरवासी पुष्कर घाटी भी पहुंचे और वहां बंदरों को पुए वितरित किए। श्रद्धालु इस बार मुख्य बाजार एवं सड़कों पर चारा डालने के बजाए सीधे गौशालाओं में ही पहुंचे। मंदिरों में देव दर्शन के लिए भक्तों का तांता लगा रहा। कई दान-दाताओं ने बाजार में ही पकौड़ी एवं पुए बनाकर लोगों को वितरित किए। लोगों ने मंदिरों में जाकर अपने आराध्य देव के दर्शन कर प्रसाद चढ़ाया। महिलाओं की ओर से मकर संक्रांति के मौके पर तेरुंडे वितरित करने की रस्म भी अदा की गई। महिलाओं ने अखंड सुहाग की कामना के साथ 13 महिलाओं को विभिन्न तरह की वस्तुएं देकर आशीर्वाद लिया। महिलाओं ने सास, जेठानी तथा ननद को सुहाग सामग्री भेंट की। मंदिरों में जाकर भी खिचड़ी, चावल एवं तिल से बने व्यंजन बनाए गए। शहर के बजरंग गढ़ और महावीर सर्किल पर लोगों ने गरीबों को कपड़े और खाद्य सामग्री वितरित की। लोगों ने पतंग उड़ाकर अपने शौक को पूरा किया। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार- 14 जनवरी को प्रातः 8:56 से पुण्य काल प्रारंभ होगा, जो पुनर्वसु नक्षत्र से प्रारंभ होकर पुष्य नक्षत्र में विश्व कुंभ योग बनाएगा। इस दिन तीर्थ में स्नान, पूजन और दान पुण्य करने का करोड़ों गुना फल मिलता है। इस दिन दान पुण्य हवन का श्रेष्ठ योग वर्षों बाद बन रहा है। इस दिन धर्मराज जी का पूजन, उद्यापन, हवन पूजन, दान पुण्य का विशेष महत्व रहता है। वर्ष में एक बार इस विशेष पूजा से मनुष्य कर्म बंधन से मुक्त होकर मोक्ष प्राप्ति को अग्रसर होता है।


