क्या जान की कोई कीमत नहीं…:जो दवाएं स्वास्थ्य के लिए घातक, वे सभी दुकानों पर आसानी से मिल रहीं

छिंदवाड़ा सिरप कांड में 24 बच्चों की दर्दनाक मौत के बाद भी स्थिति में कोई बदलाव नहीं है। औषधि महानियंत्रक (DCGI) ने 11 अप्रैल 2025 को “जन स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम” बताते हुए 35 फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन (FDC) दवाओं को अनअप्रूव्ड घोषित कर उन्हें बनाने और बेचने पर रोक लगा दी थी। इंदौर और आसपास के मेडिकल स्टोर्स और प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्रों पर भी ये दवाएं आसानी से उपलब्ध हैं। दैनिक भास्कर की पड़ताल में इंदौर, धार, देवास, उज्जैन के करीब 75 से ज्यादा मेडिकल स्टोर पर ये अनअप्रूव्ड दवाएं मिलीं। इन दवाओं का इस्तेमाल बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों में खांसी-जुकाम, बुखार, चर्म रोग और शुगर जैसी बीमारियों के लिए किया जा रहा है। औषधि महानियंत्रक ने इन दवाओं को अनअप्रूव्ड घोषित किया 1. ऑफ्लॉक्सासिन 50mg + ऑर्निडाजोल 125mg + रेसैकैडोट्रिल
उपयोग: बच्चों को डायरिया (दस्त), पेचिश, पेट दर्द, और डिहाइड्रेशन रोकने।
2. नॉरफ्लॉक्सासिन 125mg + मेट्रोनिडाजोल 120mg + सिमेथिकोन
उपयोग: दस्त व पेट के संक्रमण में।
3. सेफिक्सिम 200mg + एज़िथ्रोमाइसिन 250mg + लैक्टिक-ऐसिड बैसिलस टैब
उपयोग: कान, गला, सांस की नली, फेफड़े, त्वचा, पेट संबंधी संक्रमण में।
4. मेटफॉरमिन हाइड्रोक्लोराइड (एसआर) 500एमजी+ वोग्लिबोस 0.2
उपयोग: टाइप-2 डायबिटीज़ में।
5. ग्लिमाप्राइड आईपी 1 एमजी + मेटफॉर्मिन एचसीएल आईपी 500 एमजी
उपयोग – शुगर पेशेंट के लिए।
6. कीटोकोनाज़ोल + नियोमाइसिन+ आयोडोक्लोरहाइड्रॉक्सीक्विनोलिन+(क्लोबेटासोल प्रोपियोनेट)
उपयोग – बैक्टीरिया और फंगस के त्वचा संक्रमणों में। क्या है एफडीसी दवाएं
फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन (एफडीसी) दो या दो से अधिक ड्रग मिलाकर तैयार की जाती है। अमेरिका और कई यूरोपीय देशों में एफडीसी दवाओं की प्रचुरता पर रोक है। भास्कर एक्सपर्ट ये बेसिक प्रिंसिपल ऑफ मेडिसिन के खिलाफ है। बच्चों में बिना डॉक्टरी सलाह के दें तो जानलेवा हो सकती हैं। -डॉ. एसके भंडारी, एमडी शिशुरोग कहीं तुरंत मिल गई, कहीं बाहर से मंगवा कर दी मेडिसिन के बेसिक प्रिंसिपल के ही खिलाफ हैं ये कॉम्बिनेशन ऐसी सभी दवाएं बुरी नहीं हैं। पिल बर्डन कम करने ये काम में ली जाती हैं। बिना डॉक्टर की परमिशन नहीं लेनी चाहिए। -डॉ. संदीप जुल्का, एमडी डॉक्टर्स सिंगल ड्रग लिखने की कोशिश करें। केंद्र की गाइडलाइन का पालन करें। – दिलीप चिंचोलेकर, रिटा. डिप्टी डायरेक्टर फूड एंड ड्रग जिम्मेदरों ने – इस तरह झाड़ा पल्ला
ये राज्य का काम है
सवाल – अब भी अनअप्रूव्ड दवा बिक रही हैं?
जवाब – ये देखना राज्य का काम है, हमें जानकारी नहीं।
कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे?
आप दिल्ली हेड ऑफिस या मिनिस्ट्री में बात करें।
– गौरव कुमार, उप औषधि नियंत्रक (भारत) कई सालों से बिक रही हैं…
सवाल – अनअप्रूव्ड दवाओ की बिक्री कैसे हो सकती है? जवाब – कई सालों से बिक रही हैं, क्या करें?
रोक के लिए क्या कर रहे हैं?
25-30 साल से बिक रही हैं। लंबी कहानी है, इसमें क्या बताएं। -दिनेश श्रीवास्तव, ड्रग कंट्रोलर, एमपी हमें कोई जानकारी नहीं
सवाल- अनअप्रूव्ड दवाएं बिक रही हैं?
जवाब- हमारे यहां ऐसी कोई दवाई नहीं बिक रही।
डीसीजीआई के निर्देश की जानकारी नहीं है क्या?
अगर आपके पास आदेश है तो हमें शेयर करें, दिखवा लेंगे। -कमल अहिरवार, ड्रग इंसपेक्टर, इंदौर

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