मकर संक्रांति के पावन अवसर पर झारखंड के प्रसिद्ध शक्तिपीठ रजरप्पा स्थित मां छिन्नमस्तिका मंदिर में हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। बिहार, बंगाल और ओडिसा से आए भक्तों ने दामोदर-भैरवी संगम में आस्था की डुबकी लगाई और मां छिन्नमस्तिका के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। मंदिर के पुजारी के अनुसार, इस सिद्धपीठ में स्नान कर मां भगवती के दर्शन से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और परिवार पर मां की विशेष कृपा बनी रहती है। मकर संक्रांति पर किए गए दान-पुण्य का विशेष महत्व है, यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। मकर संक्रांति के बाद से शुभ कार्य होंगे शुरू मकर संक्रांति से सूर्य उत्तरायण होता है, जिससे खरमास की अवधि समाप्त हो जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, खरमास में मांगलिक कार्यों पर रोक होती है। मकर संक्रांति के बाद से विवाह, मुंडन, जनेऊ और नामकरण जैसे शुभ कार्य प्रारंभ हो जाते हैं। लोगों ने पूजा के बाद यहां पिकनिक का भी आनंद उठाया वहीं, मनोरम वादियां और प्राकृतिक सौंदर्य के बीच नए छिन्नमस्तिका मंदिर प्रक्षेत्र शानदार पिकनिक स्पॉट भी बन गया है। जिस कारण यहां भैरवी नदी में नौका विहार के लिए भी लोगों की अच्छी-खासी भीड़ देखी गई। लोग पूजा के बाद यहां पिकनिक का भी आनंद उठा रहे हैं। छह हजार वर्ष से अधिक पुराना है मंदिर
यह मंदिर छह हजार वर्ष से अधिक पुराना माना जाता है और आज भी रोज हजारों श्रद्धालु यहां पूजा करने पहुंचते हैं। रजरप्पा के भैरवी-भेड़ा और दामोदर नदी के संगम पर स्थित मां छिन्नमस्तिका मंदिर में सालों भर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है, लेकिन शारदीय नवरात्र और चैत्र नवरात्र के समय यहां भक्तों की संख्या दोगुनी हो जाती है। ये भी पढ़िए मकर संक्रांति पर बाबा बैद्यनाथ में विशेष पूजा:तिल-गुड़ और खिचड़ी का भोग लगा, भीषण ठंड में भी उमड़े श्रद्धालु देवघर के प्रसिद्ध द्वादश ज्योतिर्लिंग बाबा बैद्यनाथ मंदिर में मकर संक्रांति का पर्व बड़ी धूमधाम से मनाया गया। मंगलवार को अहले सुबह पुरोहितों द्वारा कांचा जल पूजा किया गया। इसके बाद, सरदार पंडा गुलाब नंद ओझा ने विधिवत सरकारी पूजा संपन्न की। परंपरा के अनुसार, बाबा बैद्यनाथ को तिल, गुड़ और खिचड़ी का विशेष भोग लगाया गया। पढ़िए पूरी खबर…


