अंशकालीन कर्मचारियों को नहीं मिल रहा कलेक्टर दर से वेतन:20 साल से नियमित भर्ती नहीं, 5000 रुपए में काम करने को मजबूर; डीपीआई का घेराव करेंगे कर्मचारी

मध्य प्रदेश में अंशकालीन कर्मचारियों के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ आल डिपार्टमेंट आउटसोर्स, अस्थाई कर्मचारी मोर्चा ने लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) का घेराव करने का निर्णय लिया है। मोर्चा के अध्यक्ष वासुदेव शर्मा के अनुसार, पशुपालन विभाग ने नवंबर 2022 में अंशकालीन कर्मचारियों को चतुर्थ श्रेणी का दर्जा देने का नोटिफिकेशन जारी किया था। लेकिन दो साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी इस पर अमल नहीं हुआ है। कर्मचारियों को अभी भी मात्र 5,000 रुपए मासिक वेतन पर काम करना पड़ रहा है। डीपीआई ने 2 अक्टूबर 2024 को मुख्य रसोईया, सहायिका, सुरक्षा कर्मियों और भृत्यों को कलेक्टर दर पर भुगतान करने के आदेश जारी किए। हालांकि, यह लाभ केवल उत्कृष्ट और मॉडल स्कूलों के अस्थाई चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों तक ही सीमित रखा गया है। शर्मा ने बताया कि पिछले 20 वर्षों से चतुर्थ श्रेणी में नियमित भर्तियां नहीं हुई हैं और अधिकांश पद आउटसोर्स कर दिए गए हैं। पिछले एक साल से अंशकालीन कर्मचारियों ने संगठित होकर अपनी मांगों को उठाना शुरू किया है, जिसके कारण शासन स्तर पर इस मुद्दे पर चर्चा होने लगी है। यदि शासन के निर्देशों का पालन नहीं किया गया, तो स्कूलों और छात्रावासों के अंशकालीन कर्मचारी, एसएमडीसी के भृत्य, रसोईया, चौकीदार और सहायिका मिलकर डीपीआई का घेराव करेंगे।

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