प्रतापगढ़ जिले में वर्षों से जारी अवैध कॉलोनियों का विस्तार, नदी-नालों पर कब्जा, तालाबों के भराव और चारागाह भूमि पर निर्माण जैसी समस्याओं को रोकने के लिए अब जिला प्रशासन ने सख्त रुख दिखाया है। जिला कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रतिबंधित श्रेणी की सभी सार्वजनिक भूमियों से अतिक्रमण हटाया जाए और अवैध भू-खण्ड आवंटन व निर्माण पर कठोर कार्रवाई की जाए। यह आदेश किसी एक क्षेत्र या शिकायत तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे जिले के शहरी और ग्रामीण दोनों इलाकों पर लागू होगा। यह कार्रवाई राजस्थान काश्तकारी अधिनियम 1955 की धारा 16, राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के आदेशों, उच्च न्यायालय के फैसलों और राज्य सरकार के परिपत्रों के आधार पर की जा रही है। उच्च न्यायालय के निर्देशों के तहत कार्रवाई जिला कलेक्टर के आदेश में जयपुर और जोधपुर पीठ के महत्वपूर्ण उच्च न्यायालयी फैसलों का उल्लेख किया गया है। इन निर्णयों में स्पष्ट कहा गया है कि नदियों, नालों, तालाबों, जोहड़ों, चारागाहों और जल प्रवाह क्षेत्र जैसी सार्वजनिक भूमि पर किसी प्रकार का निजी कब्जा या आवंटन अवैध माना जाएगा। इसी के तहत नगर परिषद, पंचायत समितियां और ग्राम पंचायतों को आदेश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में ऐसी भूमियों को तत्काल चिन्हित कर रिकॉर्ड तैयार करें और अवैध कब्जों के विरुद्ध त्वरित स्तर पर प्रकरण बनाकर पब्लिक लैंड प्रोटेक्शन सेल (PLPC) को भेजें। नगर परिषद प्रतापगढ़ पर विशेष फोकस आदेश में विशेष रूप से नगर परिषद प्रतापगढ़ क्षेत्र को फोकस में रखा गया है। शहर में नाला भूमि, कैचमेंट क्षेत्रों और जल प्रवाह स्थलों पर हुए भू-उपयोग परिवर्तन, नीलामी, आवंटन व निर्माण कार्यों की गंभीर शिकायतों के मद्देनजर कलेक्टर ने गहन जांच के निर्देश दिए हैं। साथ ही राजस्व रिकॉर्ड और स्वीकृत मास्टर प्लान व जोनल प्लान में दर्ज भूमि को हर हाल में संरक्षित करने का आदेश जारी किया गया है। गलत आवंटनों और अवैध भू-उपयोग परिवर्तन मामलों में रेफरेंस और अपील दायर करना भी अनिवार्य किया गया है, ताकि सार्वजनिक भूमि को कानूनी रूप से सुरक्षित किया जा सके। 7 दिन की समय-सीमा, गलत रिपोर्ट देने पर होगा दंड इस पूरे अभियान के लिए प्रशासन ने 7 दिवस की सख्त समय-सीमा तय की है। सभी संबंधित विभागों, अधिकारियों और एजेंसियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपनी कार्रवाई की सच्ची और तथ्य आधारित पालना रिपोर्ट समय पर प्रस्तुत करें। आदेश में यह चेतावनी भी शामिल है कि यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी भ्रामक या झूठी जानकारी पर आधारित रिपोर्ट दर्ज कराता है, तो इसे न्यायालय के आदेशों की अवहेलना मानकर उसके खिलाफ अवमानना सहित कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। पर्यावरण और जल संरक्षण को प्राथमिकता प्रशासन का यह कदम केवल कानूनी कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण, जल स्रोतों की सुरक्षा और आने वाली पीढ़ियों के हित की दिशा में बड़ा प्रयास माना जा रहा है। तालाबों और नदी-नालों पर अतिक्रमण से जल संकट, शहरी बाढ़, प्रदूषण और पारिस्थितिक असंतुलन जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है, जिसे रोकना अब अनिवार्य हो गया है। जिला कलेक्टर का यह निर्देश प्रतापगढ़ में भूमि माफियाओं और अवैध कॉलोनाइजर के खिलाफ एक मजबूत और निर्णायक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। यदि इन आदेशों की ईमानदार पालना होती है, तो यह प्रतापगढ़ के विकास और पर्यावरणीय संतुलन के लिए ऐतिहासिक साबित हो सकता है।


