धनबाद के आईआईटी आईएसएम में मकर संक्रांति का त्योहार छात्रों ने अपने अनूठे अंदाज में मनाया। संस्थान के ऐतिहासिक हेरिटेज बिल्डिंग के सामने स्थित ओवल ग्राउंड में दर्जनों छात्र-छात्राएं एकत्र हुए और पतंगबाजी का आनंद लिया। देश के विभिन्न राज्यों से आए छात्रों ने अपने घर से दूर होने का गम भुलाने के लिए दोस्तों के साथ पतंगबाजी की और परंपरागत दही-चूड़ा का स्वाद चखा। छात्रों ने बताया कि दोस्तों का साथ और पतंगबाजी की मस्ती घर की याद को कम कर देती है। मकर संक्रांति में पतंग उड़ाने की परंपरा रही है मकर संक्रांति, जिसे खिचड़ी और उत्तरायण के नाम से भी जाना जाता है। मकर संक्रांति में पतंग उड़ाने की परंपरा रही है। तमिल रामायण के अनुसार, सर्वप्रथम भगवान श्रीराम ने इस दिन पतंग उड़ाई थी, जो इतनी ऊंची उड़ी कि इंद्रलोक तक पहुंच गई। तभी से यह परंपरा चली आ रही है। लोग पतंग उड़ाकर जीवन में सफलता की कामना करते हैं पतंग उड़ाना शुभता और खुशी का प्रतीक माना जाता है। इस दिन लोग पतंग उड़ाकर अपने जीवन में सफलता और समृद्धि की कामना करते हैं। आईआईटी आईएसएम के छात्रों ने भी इस परंपरा को जीवंत रखते हुए त्योहार को यादगार बनाया।


