अरावली पर्वतमाला के संरक्षण को लेकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के नाम राष्ट्रपति सचिवालय में एक याचिका दायर की गई है। इसमें 100 मीटर और उससे ऊंची पहाड़ियों को ही अरावली मानने की शर्त हटाने और पर्वतमाला की परिभाषा पुनः निर्धारित करने की मांग की गई है। यह याचिका राजस्थान बीज निगम के पूर्व निदेशक और बूंदी के कांग्रेस नेता चर्मेश शर्मा ने दायर की है। उन्होंने इस विषय में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में भी शिकायत दर्ज कराई है। याचिका में अरावली को आधे भारत की जीवन रेखा बताया गया है। इसमें कहा गया है कि भारत सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की समिति द्वारा सुप्रीम कोर्ट में 100 मीटर और इससे अधिक ऊंची पहाड़ियों को ही अरावली पर्वतमाला मानने की रिपोर्ट प्रस्तुत करना और सुप्रीम कोर्ट द्वारा उसे स्वीकार करना पर्यावरण तथा भविष्य के मानव जीवन के हितों के विपरीत है। राष्ट्रपति मुर्मू के नाम दायर याचिका में मांग की गई है कि वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की उस समिति की सिफारिशों के संदर्भ में भारत सरकार को एक उच्च स्तरीय समिति गठित करनी चाहिए। इस नई समिति को अरावली पर्वतमाला के संदर्भ में ऊंचाई के अव्यवहारिक प्रावधानों को हटाकर सुप्रीम कोर्ट में संशोधित रिपोर्ट प्रस्तुत करनी चाहिए। याचिका में यह भी कहा गया है कि अरावली पर्वतमाला के संदर्भ में ऊंचाई की बाध्यता को समाप्त किया जाना चाहिए और पर्यावरण संरक्षण तथा पारिस्थितिक तंत्र के संतुलन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। जैव विविधता के नष्ट होने का खतरा-चर्मेश शर्मा
राष्ट्रपति सचिवालय में दायर याचिका में राजस्थान बीज निगम के पूर्व निदेशक चर्मेश शर्मा ने कहा कि अरावली पर्वतमाला के संदर्भ में मनमाने निर्णय से भविष्य में पर्यावरण पर गंभीर संकट आ सकता है इससे जैव विविधता के भी समाप्त होने का खतरा है। अरावली के संरक्षित दायरे की परिभाषा ऊंचाई व दूरी के स्थान पर वैज्ञानिक और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता के आधार पर तय की जानी चाहिए।


