पाली शहर में मंगलवार को मकर संक्रांति पर सुबह से ही मंदिरों में शहरवासियों की भीड़ रही। लोगों ने जमकर दान-पुण्य किया। कोई गायों को चारा खिलाते नजर आया तो किसी ने तिल के व्यंजन दान किए। बच्चे और युवा घरों की छत पर पतंग उड़ाने का लुत्फ लेते नजर आए। इधर, महिलाओं ने पूजा-अर्चना कर मां तुलसी की परिक्रमा की और 13 वस्तुओं के दान का संकल्प किया। मंगलवार को भी बाजार में कई महिलाएं तेरुंदा और तिल के व्यंजन खरीदती नजर आई।
मकर संक्रांति पर परम्परा के अनुसार घरों में तिल के व्यंजन और मक्की के बाकले बनाए। जिनका भगवान को भोग लगाया गया। सुबह लोगों ने सूर्य के अर्ध्य भी चढ़ाया। घरों में पारंपरिक व्यंजन बनाए गए। महिलाओं ने दीप, ग्लास, लोटा, पर्स, साबुन, चप्पल एवं वस्त्र आदि का दान किया। इसके साथ ही शहरवासियों ने जरूरतमंदों में तिल से बने व्यंजन, नमक, कपड़े आदि का दान किया। शहर के गीता भवन, सोमनाथ मंदिर सहित कई मंदिरों में लोगों की भीड़ देखने को मिली। शहर के कई मोहल्लों और सड़क किनारे लोग गायों को चारा खिलाते नजर आए।
सनातन धर्म में मकर संक्रांति का महत्व
संत प्रेमानंद ने बताया किसनातन धर्म में मकर संक्रांति का बहुत ही महत्व है। पौष मास में जब सूर्य अपने पुत्र शनि की राशि मकर में प्रवेश करते हैं, तभी इस पर्व को मनाया जाता है। इस दिन जप, तप, दान और स्नान का विशेष महत्व है। सूर्य जब मकर राशि में प्रवेश करेंगे तब पांच ग्रहों का संयोग बनेगा, जिसमें सूर्य, बुध, गुरु, चंद्रमा और शनि भी शामिल रहेंगे। इस मकर संक्राति पर कई विशेष संयोग बन रहे हैं, जो इस पर्व को और भी शुभ बना रहे हैं।
मकर संक्रांति के दिन सूर्य धनु राशि से निकल अपने पुत्र शनि की राशि मकर में प्रवेश करते हैं। माना जाता है कि इस दिन सूर्य अपने पुत्र शनि से मिलने के लिए खुद उनके घर आते हैं। इस वजह से इस खास दिन को मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है। इस दिन सूर्य उत्तरायण होते हैं। शास्त्रों में बताया गया है कि उत्तरायण देवताओं का दिन और दक्षिणायन रात होती है। सूर्य के उत्तरायण होने पर गरम मौसम की शुरुआत हो जाती है। इस दिन दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।


