झारखंड हाईकोर्ट ने पूर्व रेलवे और मोदी प्रोजेक्ट कंपनी के बीच चल रहे विवाद के निपटारे के लिए सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत जज दीपक गुप्ता को एकमात्र मध्यस्थ नियुक्त किया है। चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा है कि जब अनुबंध में मध्यस्थता की शर्त मौजूद हैं तब अदालत का दायरा सिर्फ यह देखने तक सीमित है कि मध्यस्थता समझौता अस्तित्व में है या नहीं। दावा समय-सीमा से बाहर है या नहीं, ऐसे सवालों का निर्णय मध्यस्थ द्वारा किया जाएगा। मालूम हो कि वर्ष 2007-2008 में पूर्व रेलवे द्वारा हंसडीहा-दुमका नई ब्रॉडगेज रेल लाइन परियोजना के तहत मोदी प्रोजेक्ट को 15.23 करोड़ रुपए का ठेका मिला था। रेलवे का आरोप है कि ठेकेदार ने समय पर प्रोजेक्ट पूरा नहीं किया। इस वजह से 27 जुलाई 2012 को कार्यादेश रद कर दिया गया। वहीं, कंपनी की ओर से दलील दी गई कि रेलवे प्रशासन ने जमीन उपलब्ध नहीं कराया। हाई टेंशन लाइन, ब्लास्टिंग की अनुमति नहीं मिलने और नक्सली गतिविधियों की वजह से काम में देरी हुई। इसलिए प्रोजेक्ट में देरी के लिए रेलवे जिम्मेदार है।


