2 दिन पहले सरेंडर नक्सलियों ने खोले राज, तब फंसा गणेश, उस पर 16 FIR

ओडिशा में कंधमाल-गंजम जिले के सरहदी इलाके में घने जंगलों के बीच मुठभेड़ में नक्सलियों का सीसी मेंबर पक्का हनुमंतु उर्फ गणेश उइके अपने 5 साथियों के साथ मारा गया है। सुकमा और बीजापुर जिले में ही उस पर फोर्स के जवानों, ग्रामीणों की हत्या, अपहरण जैसे 16 आपराधिक मामले दर्ज थे। मिशन 2026 के तहत ज्यादातर बड़े नक्सलियों के आत्मसमर्पण या एनकाउंटर में मारे जाने के बाद फोर्स को गणेश की सरगर्मी से तलाश थी। 2 दिन पहले मलकानगिरी में सरेंडर करने वाले 22 नक्सलियों से मिले इनपुट को ही इतनी बड़ी सफलता का कारण माना जा रहा है। बताते हैं कि मलकानगिरी में मंगलवार को 22 नक्सलियों ने सरेंडर किया। इनमें कुछ वरिष्ठ कमांडर और महिला सदस्य भी शामिल थे। सरेंडर नक्सलियों ने पुलिस को उनके छिपे कैंपों, वरिष्ठ नेताओं की लोकेशन और ऑपरेशनल नेटवर्क की जानकारी दी। इसी आधार पर कंधमाल में गणेश उइके की लोकेशन पर बुधवार रात ही ऑपरेशन लॉन्च कर ​िदया गया था। गुरुवार तड़के तक चली मुठभेड़ में छह नक्सली मारे गए। मिली जानकारी के मुताबिक, गणेश उइके करीब 69 साल का था। उसे रूपा, राजेश तिवारी, चमरू, पक्का हनुमंतु, गणेशन्ना और सोमारू जैसे कई छद्म नामों से भी पहचाना जाता था। वह तेलंगाना में नलगोंडा जिले के चेंदुर मंडल स्थित पुल्लेमाला गांव का रहने वाला था। 1988 से दंडकारण्य में सक्रिय था। 1988–1998 में उसने जगदलपुर में सिटी ऑर्गेनाइजर, 1998 से 2006 तक वेस्ट बस्तर डिवीजनल कमेटी सचिव रहा। 2006 के बाद से दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी सदस्य के तौर पर काम कर रहा था। 2014 में सुकमा के तोंगपाल क्षेत्र अंतर्गत टाहकवाड़ा में पुलिस दल पर हमले में वह शामिल रहा। इसमें 15 जवान शहीद हो गए थे। उस पर नागरिक हत्या, हत्या, हत्या का प्रयास, अपहरण, पुलिस बलों पर सशस्त्र हमले, हथियारों और विस्फोटकों के अवैध इस्तेमाल और कब्जे के मामलों में अपराध दर्ज है। बाकी माओवादियों की पहचान ओडिशा पुलिस द्वारा की जा रही है। बस्तर आईजी सुंदरराज पी ने कहा कि नक्सलियों के सामने अब आत्मसमर्पण ही अंतिम विकल्प रह गया है। हथियार डालकर वे समाज के मुख्य धारा में शामिल हो सकते हैं।

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