जयपुर सेन्ट्रल जेल में पाकिस्तानी नागरिक की हत्या करने के दोषी को हाईकोर्ट ने ओपन जेल में भेजने के आदेश दिए हैं। जस्टिस अनूप ढंड की अदालत ने कैदी भजन मीणा की याचिका को स्वीकार करते हुए उसे ओपन जेल में भेजने का आदेश दिया। साथ ही कोर्ट ने कैदी के प्रार्थना पत्र को खारिज करने के जेल प्रशासन के 24 जनवरी 2024 के आदेश को भी रद्द कर दिया। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि हर संत का अतीत होता है और हर पापी का भविष्य। केवल इस आधार पर कि याचिकाकर्ता ने पाकिस्तानी कैदी की हत्या की है। उसे ओपन एयर जेल में शिफ्ट करने से नहीं रोका जा सकता हैं। अदालत का मत है कि प्रत्येक कैदी को सुधार और पुनर्वास का अधिकार है, ताकि वह समाज में सुधरकर समायोजित हो सके। वहीं अपनी रिहाई के बाद एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में सामान्य नागरिक के समान जीवन जी सके। जेल का माहौल सुधार का उद्देश्य विफल करता है
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि अपराध करने वाले व्यक्ति को कभी खारिज नही करना चाहिए। बल्कि उसके अंदर के अपराधी मन को बदलने का प्रयास होना चाहिए। वहीं उस सामाजिक दमनकारी व्यवस्था को सुधारने की आवश्यकता है, जो कभी-कभी निर्दोष व्यक्तियों के आपराधिक व्यवहार के लिए दोषी है। अदालत ने कहा कि जेल, दंडात्मक और सुधारात्मक संस्थानों के रूप में अनादि काल से मौजूद हैं। लेकिन कभी-कभी जेल का माहौल और कैदियों के साथ किए जाने वाला व्यवहार उनके सुधार और पुर्नवास के उद्देश्य को विफल करता हैं। याचिकाकर्ता का आचरण संतोषजनक पाया गया
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता को कभी भी जेल में रहते हुए उसके आचरण के लिए सजा नहीं हुई हैं। बल्कि जेल में रहने के दौरान उसका आचरण संतोषजनक पाया गया हैं। इसके अलावा 24 मई 2023 को हाई कोर्ट ने ही कैदी को 20 दिन की पैरोल दी थी। पैरोल का लाभ उठाने के बाद वह शांतिपूर्वक जेल लौट आया। सजा के दौरान की थी पाकिस्तानी नागरिक की हत्या
दरअसल याचिकाकर्ता हत्या के मामले में पहले से आजीवन कारावास की सजा काट रहा था। इस दौरान जेल में उसका पाकिस्तानी कैदी से झगड़ा हो गया। झगड़े में याचिकाकर्ता ने पाकिस्तानी कैदी की हत्या कर दी। ट्रायल कोर्ट ने पाकिस्तानी कैदी की हत्या के आरोप में उसे 10 जनवरी 2020 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। हाई कोर्ट ने भी उसकी अपील को खारिज करते हुए सजा बरकरार रखा इस आधार पर जेल प्रशासन उसकी ओपन जेल में ट्रांसफर की एप्लीकेशन खारिज कर दी थी। जिसके खिलाफ उसने हाई कोर्ट में याचिका दायर की।


