धर्मशाला में बाईपास मरम्मत में लापरवाही:ढलान पर फेंका जा रहा मलबा, दर्जनों परिवारों पर भूस्खलन का खतरा- PWD से हस्तक्षेप की मांग

कांगड़ा जिले के धर्मशाला-मैक्लोडगंज बाईपास सड़क पर चल रहे मरम्मत कार्य में गंभीर लापरवाही सामने आई है। सड़क से निकलने वाले मलबे और मिट्टी को वैज्ञानिक तरीके से निर्धारित डंपिंग साइट पर ले जाने के बजाय सीधे ढलान की ओर फेंका जा रहा है। इस अनियमितता के कारण ऊपरी सुधेड़ गांव के दर्जनों परिवारों पर भूस्खलन का खतरा मंडरा रहा है। यह बाईपास सड़क पर्यटन नगरी को जोड़ती है और पिछले छह माह से इस पर बहाली का कार्य जारी है। ढलान पर जमा की जा रही कच्ची मिट्टी और भारी पत्थर बारिश या सामान्य दबाव से कभी भी खिसक सकते हैं। इससे नीचे स्थित ऊपरी सुधेड़ गांव के घरों और संपत्तियों को सीधा नुकसान पहुंचने की आशंका है। जान-माल का खतरा बना मलबा यदि यह मलबा खिसकता है, तो न केवल जान-माल का खतरा उत्पन्न होगा, बल्कि नीचे स्थित मुख्य संपर्क रास्ता भी पूरी तरह अवरुद्ध हो सकता है। यह लापरवाही नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है और स्थानीय लोगों के लिए चिंता का विषय बन गई है।पूर्व नगर परिषद पार्षद वीरेंद्र परमार ने इस मामले में प्रशासन और राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा, “जिस स्थान पर पहले भूस्खलन हुआ था, विभाग वहीं दोबारा खुदाई का मलबा डंप कर रहा है। यह घोर लापरवाही है। मलबे को डंपिंग साइट पर ले जाने के बजाय मौके पर फेंक कर नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।”
PWD अधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग परमार ने मुख्यमंत्री और लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारियों से इस गंभीर मुद्दे पर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है, ताकि किसी बड़े हादसे को टाला जा सके। कांगड़ा जिले की सबसे व्यस्त सड़कों में से एक यह बाईपास सड़क कांगड़ा जिले की सबसे व्यस्त सड़कों में से एक है। धर्मशाला से मैक्लोडगंज, नड्डी और भाग्सूनाग जाने वाले हजारों पर्यटक रोजाना इसी रास्ते का उपयोग करते हैं। इसके अतिरिक्त, जोनल अस्पताल और आपातकालीन वाहनों के लिए यह एक वैकल्पिक और सुगम रास्ता है, तथा दर्जनों स्कूल बसें और स्थानीय लोग भी इसी रास्ते से गुजरते हैं।

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