सरकार के दो साल के कार्यकाल का फैक्टर आप को कर रहा मजबूत

भास्कर न्यूज | अमृतसर सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी अमृतसर नगर निगम हाउस में बहुमत साबित करने के लिए डिवीजनल कमिश्नर की बैठक की कॉल का इंतजार कर रही कांग्रेस पार्टी की मुश्किलें बढ़ाने में लगी हैं। आप को बहुमत दिलाने का जिम्मा उठाए कैबिनेट मंत्री कुलदीप सिंह धालीवाल ने मंगलवार को दो और आजाद पार्षदों को पार्टी ज्वाइन करवा ली। इससे आप के पास 38 वोट हो गए हैं। जब​कि कांग्रेस के पास 41 वोट हैं, जबकि बहुमत के​ लिए 46 वोट चाहिए। कांग्रेस ने 85 में से सबसे ज्यादा 40 सीटों पर जीत हासिल की थी, वहीं आप ने 24 सीटें जीती थी। चुनाव में हार मिलने के बावजूद आप के नेता अपना कुनबा बढ़ाने में लगे हैं तो दूसरी ओर कांग्रेसी गुटबाजी में फंसे हैं। अब कुल मिलाकर भाजपा के 8, अकाली दल के 4 और एक आजाद पार्षद ही बचा है। इन्हीं पार्षदों में से दोनों पार्टियों को अपने पाले में लाने का प्रयास कांग्रेस और आप को करना होगा। इससे पहले चुनाव में 85 में से 40 सीटें जीतने के बाद कांग्रेस को भरोसा हो गया था कि अब वह हर हाल में हाउस बना लेगी। नतीजतन आपस में ही मेयर शिप के लिए पार्टी दो गुटों में बंट गई। हालात यहां तक पहुंचे कि सुलह के लिए चार बैठकें करनी पड़ीं, लेकिन बात नहीं बनी। आखिरकार केंद्रीय लीडरशिप ने हरीश चौधरी को आब्जर्वर बना कर भेजा और उन्होंने सभी को एक मंच पर लाने की कोशिश की और सभी ने भरोसा दिया कि हाईकमान जिस के नाम पर सहमति जताएगा उस पर सभी मोहर लगाएंगे। कांग्रेसी जहां आपसी गुटबंदी और सुलह-सपाटे में लगे हुए थे वहीं दूसरी तरफ आम आदमी पार्टी जोड़-तोड़ की सियासत से अपना कुनबा बढ़ाती जा रही थी। आलम यह हुआ कि पहले 2 फिर 2 आजाद पार्षद उसके खेमे में आ गए। इसके बाद 1 भाजपा का भी आ गया। खैर, मंगलवार को 2 आजाद पार्षदों वार्ड-67 की पार्षद अनीता रानी और 63 की ऊषा रानी ने आप ज्वाइन कर लिया है। उक्त को शामिल करवाने के लिए खुद कैबिनेट मंत्री कुलदीप सिंह धालीवाल पहुंचे थे। आप के पास वर्तमान में अपने 24, 6 आजाद और 1 भाजपा का मिलाकर 31 पार्षद हो गए हैं। इसके अलावा उसके अपने 7 विधायकों का भी वोट उसमें जुड़ेगा तो यह संख्या 38 पहुंच जाएगी। हाउस बनाने के लिए कुल 46 वोट चाहिए। यानी कि आप को अब सिर्फ 8 वोट की जरूरत है। लेकिन जिस तरीके से सुनियोजित तरीके से पार्षदों को तोड़ा जा रहा है उससे यह संख्या पूरी करना कठिन काम नहीं है। चूंकि अभी 1 आजाद, 4 अकाली और 8 भाजपाई बाहर हैं, पार्टी उन पर भी डोरे डाले इससे भी इंकार नहीं किया जा सकता। संभवतया तभी पार्टी अपने साथ 50 वोट होने का दावा करती है। कांग्रेस के पास 40 अपने और 1 आजाद मिला कर 41 पार्षद हैं। हाउस बनाने के लिए उसे 7 पार्षद चाहिए लेकिन पार्टी की जो स्थिति है उससे यह कहना गलत न होगा कि आंकड़ा छूना आसान नहीं होगा। माना तो यह भी जा रहा है कि आप उसके अपने ही गढ़ में सेंधमारी की जुगाड़ में है और 2/3 लोग उसके राडार पर भी हैं।

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