भास्कर न्यूज | जालंधर नए वित्तीय साल के टैरीफ को लेकर पावरकॉम ने पंजाब के बिजली नियामक आयोग को रिपोर्ट पिछले साल दे दी थी। अब 16 जनवरी से बिजली नियामक आयोग जनता से सुझाव एतराज नोट करेगा। इसके लिए लिखित में सभी उपभोक्ता व कारोबारी संगठन नियामक आयोग को अपना पक्ष भेज सकते हैं। इसे लेकर मंगलवार को इंजीनियरिंग इंडस्ट्री एसोसिएशन की मीटिंग हुई। इसमें पावरकॉम से जुड़े अलग-अलग मुद्दों पर चर्चा की गई है। एसोसिएशन के सदस्यों ने फ्रीक्वेंसी मीटरों के पौने लाख रुपए के भारी भरकम खर्च, नए बिजली ग्रिड, टैरीफ और नियमों को लेकर विचार चर्चा की। अब सारे मामले लिखित में बिजली नियायक आयोग को सुझाव के रूप में भेजे जाएंगे। प्रधान सुनील शर्मा ने मीटिंग के दौरान कहा कि पंजाब की इंडस्ट्री को पड़ोसी हिमाचल की इंडस्ट्री सस्ती बिजली के कारण कंपीटीशन देती है। वहां टैक्स की छूट भी है। ऐसे में जो मिनिमम चार्जेज में लगातार बढ़ोतरी की जा रही है, इस पर ब्रेक लगाने के बारे में सरकार को विचार करना चाहिए। वर्तमान में पावरकॉम ने नया कनेक्शन लेने वालों के लिए नया नियम लागू किया है। इसके तहत जब कोई नया कनेक्शन लेता है तो उससे एडवांस सिक्योरिटी की रकम अब 100 फीसदी ली जाती है। पुराने नियम में राहत होती थी, अब बोझ बढ़ा है। शर्मा ने कहा कि पहले कनेक्शन की अर्जी देते हुए केवल 5 फीसदी रकम देनी होती थी। फिर कनेक्शन का प्रोसेस होने के बाद अगली किश्त 25 फीसदी की होती थी। इस तरह जैसे जैसे कनेक्शन का काम होता था, किश्तों में पैसा इंडस्ट्री संचालक देते है। पुराना निगम दोबारा लागू होगा। दूसरी बात ये है कि जो पावर इंटेसिव यूनिटों को नए फ्रीक्वेंसी बिजली मीटर लगाने के आदेश हुए हैं, इनमें भी राहत प्रदान की जाए। ये मीटर पावरकाम अपने खर्चे पर लगाए। ये मीटर लगाने पर उपभोक्ता का करीब पौने तीन लाख का खर्च है। पावरकॉम खुद का मीटर लगाकर किराया ले सकता है। जब कीमत रिकवर हो जाए तो किराए में राहत दे दी जाए। इंडस्ट्री वाले पाकेट का सर्वेक्षण करके नए ग्रिडों की योजना लांच की जाए। मीटिंग के दौरान फैक्ट्रियों में रिपेयर के दौरान जीओ स्विच की सुविधा की मांग की गई है। ताकि जिस कनेक्शन पर कोई काम पावरकाम कर रहा है तो पूरी लाइन बंद करने की बजाय केवल संबंधित फैक्ट्री परिसर में ही बिजली कटौती हो। अभी पूरी लाइन का एक ही जीओ स्विच होता है, जिससे किसी एक फैक्ट्री के कनेक्शन का फाल्ट ठीक करने की खातिर पूरी लाइन बंद कर दी जाती है। इससे पूरा इलाका प्रभावित होता है।


