शाला दर्पण रैंकिंग में लगातार पिछड़ रहा उदयपुर दिसंबर में तो पूरी तरह धड़ाम हो गया। साल 2024 के अंतिम माह की रैंकिंग लिस्ट में 33वें नंबर पर रहा। यानी प्रदेश के सभी पुराने 33 जिलों में फिसड्डी। इस तरह की रैंकिंग अब से पहले उदयपुर ने कभी हासिल नहीं की। इस रैंकिंग ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशानों को और गहरा कर दिया है। उदयपुर ने दिसंबर माह में 23.3 का स्कोर प्राप्त किया। इससे पहले नवंबर माह में 39.4 स्कोर हासिल किए थे और 22वें स्थान पर रहा था। पहले स्थान पर रहे सीकर जिले को 53 स्कोर मिला है। संभाग में डूंगरपुर का प्रदेश में दूसरा स्थान है। इसे 49.9 स्कोर मिला है। चित्तौड़गढ़ 45.5 स्कोर के साथ सातवें स्थान पर, 43.7 स्कोर पर राजसमंद 10वें स्थान पर, भीलवाड़ा 43.5 स्कोर के साथ 11वें, प्रतापगढ़ 38.3 के साथ 17वें और बांसवाड़ा 27.9 स्कोर के साथ 28वें स्थान पर है। बता दें कि पिछले साल जनवरी-फरवरी और मार्च तक उदयपुर लगातार टॉप-10 जिलों में शामिल रहा था। फिर लोकसभा चुनाव खत्म होने के बाद जारी हुई रैंकिंग में उदयपुर 5 पायदान फिसलकर 11वें स्थान पर आ गया था। अब पिछड़ने के सवाल पर विभाग के अधिकारियों ने चुप्पी साध ली है। निदेशक के आदेश-अपनी स्थिति को सुधारे उदयपुर माध्यमिक शिक्षा के निदेशक आशीष मोदी ने रैंकिंग में उदयपुर समेत अंतिम 3 स्थान वाले जिलों जालौर व धौलपुर को सघन मॉनिटरिंग कर अपने जिलों को इस स्थिति को सुधारने की आदेश दिए हैं। बता दें कि सरकारी स्कूलों की रैंकिंग तय करने के लिए शाला दर्पण पोर्टल पर सभी स्कूलों को हर माह विद्यालय की श्रेणी, शैक्षिक गुणवत्ता, बेसिक प्रोफाइल, कर्मचारियों की संख्या, नामांकन की स्थिति, विद्यालयों में उपलब्ध संसाधन, सुविधाएं, सेवा रिकॉर्ड, छात्रवृत्ति योजना, भामाशाहों का दान जैसे 44 बिंदुओं सहित अन्य आवश्यक सूचनाओं को अपलोड करना होता है। ताकि राज्य स्तर पर यह पता चल पाए कि किस जिले में क्या स्थिति बनी हुई है।


