पूर्व कमिश्वर बोले- अधिकार नहीं सेवा का अवसर है पद:राजगढ़ में कहा- संवाद और संवेदनशीलता से ही सुशासन संभव

राजगढ़ में शुक्रवार को एक जिला स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें पूर्व कलेक्टर और उज्जैन संभाग के पूर्व कमिश्नर आनंद शर्मा ने प्रशासनिक अधिकारियों को संबोधित किया। मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े शर्मा ने कहा कि प्रशासनिक पद को अधिकार नहीं, बल्कि जनता की सेवा का अवसर मानना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि संवेदनशीलता के साथ जिम्मेदारियों का निर्वहन ही सुशासन की वास्तविक पहचान है। शर्मा ने राजगढ़ में जनसुनवाई और संवाद आधारित व्यवस्थाओं की सराहना की। उन्होंने इन पहलों को जनता और प्रशासन के बीच विश्वास बढ़ाने वाला बताया। आनंद शर्मा ने कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा की कार्यशैली की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि “संवाद से समाधान” जैसी पहल प्रशासन को आमजन से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम है। इससे समस्याओं का समय पर समाधान होता है और लोगों का प्रशासन पर भरोसा बढ़ता है। बोले- दोबारा आना भावनात्मक
शर्मा ने राजगढ़ में लंबे समय तक काम करने के अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि यहां दोबारा आना उनके लिए भावनात्मक है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि पद के साथ मिलने वाली जिम्मेदारी समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का अवसर है, जिसे मानवीय दृष्टिकोण से निभाना चाहिए। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के व्यक्तित्व को भी याद किया। ग्वालियर रेस्ट हाउस में उनसे हुई मुलाकात का जिक्र करते हुए शर्मा ने कहा कि सरलता, संवेदनशीलता और विनम्रता ही सच्चे नेतृत्व की पहचान होती है। पूर्व कमिश्नर ने बाल विवाह जैसी सामाजिक कुप्रथाओं के खिलाफ लगातार प्रयास करने पर जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन की भूमिका केवल कानून लागू करने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज को सही दिशा देना भी है, विशेषकर बालिकाओं के सुरक्षित भविष्य के लिए। कार्यशाला में कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा ने जिले में किए जा रहे प्रशासनिक प्रयासों की जानकारी दी। कार्यक्रम के अंत में अन्य अधिकारियों ने भी अपने अनुभव साझा किए। इस आयोजन का मुख्य संदेश यह रहा कि सुशासन को संवाद, संवेदनशीलता और सेवा भावना से ही मजबूती मिलती है।

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