लुधियाना| नशा बेचने के लिए मजबूर करने वालों की वीडियो डालकर खुदकुशी किए जाने के मामले में एक भाई ने 2.5 साल बाद पुलिस को केस दर्ज करने पर मजबूर कर दिया है। एक भाई की हिम्मत की यह कहानी मोहल्ला अमरपुरा की है। 2023 में आशु सोनी ने उसे मजबूर करने वाले आरोपियों की वीडियो बना खुदकुशी कर ली थी। हाईकोर्ट के आदेश पर माधोपुरी निवासी विशाल सोनी की शिकायत पर डिवीजन-2 में नीलम, वारिस, राजवीर, सिमरन, अंकित के खिलाफ केस दर्ज किया है। 2002 में माता-पिता की मौत के बाद दो भाई ही एक-दूसरे का सहारा थे। मार्च 2023 में आशु ने सोनिया से शादी की। आशु ने कुछ लोगों से कर्ज लिया था। उन्होंने कर्ज के दबाव में उसे नशे का तस्कर बना दिया। आशु बदलना चाहता था। लेकिन आरोपियों के दबाव से टूटकर 15 जून 2023 को आशु ने फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। उसे जब वीडियो का पता चला तो मेरी आरोपियों पर केस दर्ज करने की मांग पुलिस ने वीडियो फर्जी बता नहीं सुनी। मैंने फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा। 8 महीने थाने के चक्कर काटे। 2024 में मुझे आर.टी.आई से पता चला, फोरेंसिक रिपोर्ट आई है। लेकिन पुलिस केस दर्ज नहीं कर रही। एक दिन पुलिस कर्मी ने कहा,केस दर्ज नहीं होगा। मैं 5 माह ओवरटाइम कर अच्छे वकील की मदद से जुलाई 2025 में हाईकोर्ट पहुंचा। 6 महीने बाद मेरी बात सुनी गई, पुलिस को केस दर्ज करने के आदेश दिए। मेरा मकसद आरोपियों को सजा दिलवाना है। – जैसा विशाल सोनी ने दैनिक भास्कर को बताया 48 घंटे में केस दर्ज होता है सुप्रीम कोर्ट अनुसार अगर फोरेंसिक रिपोर्ट यह पुष्टि करे कि वीडियो/फोन असली है और उसमें किसी संगीन अपराध के संकेत हों, तो पुलिस को 48 घंटे में केस दर्ज करना होता है। अगर पुलिस “सबूत नहीं हैं” कह केस दर्ज करने से मना करें तो सबूतों की कॉपी साथ लगाकर शिकायत दें। फिर भी न हो तो मुलाजिम की भी जांच होती है। अजय गर्ग, सीनियर एडवोकेट


