अमृतसर| दुर्गियाणा तीर्थ में आर्ट ऑफ लिविंग द्वारा आयोजित आठ दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन भक्तों ने भक्ति रस का आनंद लिया। कथा व्यास साध्वी गुरुमयी ने मार्मिक प्रसंग सुनाते हुए कहा कि जिस प्रकार चींटी स्वतः ही चीनी तक पहुंच जाती है, उसी तरह प्रत्येक जीव जानता है कि परमात्मा कहाँ है। आवश्यकता केवल ईश्वर से टूटे हुए संबंध को पुनः जोड़ने की है। साध्वी जी ने स्पष्ट किया कि भगवान को बाहरी ‘व्यवस्था’ नहीं, बल्कि भक्त की आंतरिक ‘अवस्था’ प्रिय है। यदि हमारी मानसिक अवस्था ईश्वर में लीन है, तो वे सहज ही प्राप्त हो जाते हैं। श्रीमद् भागवत का ज्ञान जीव को इसी परम अवस्था तक पहुंचाने का मार्ग है।


