तरनतारन में कांग्रेस पार्टी ने केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) में किए जा रहे बदलावों पर चिंता व्यक्त की है। इस संबंध में शनिवार को कांग्रेस भवन में एक बैठक आयोजित की गई। बैठक में पंजाब के पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. राज कुमार वेरका, पट्टी से पूर्व विधायक हरमिंदर सिंह गिल, खडूर साहिब से पूर्व विधायक रमनजीत सिंह सिक्की सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। मीटिंग को संबोधित करते हुए डॉ. राज कुमार वेरका ने कहा कि मनरेगा में किए जा रहे बदलावों को लेकर देश में गहरी चिंता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मनरेगा कोई खैरात नहीं, बल्कि देश के लिए काम का कानूनी अधिकार है। मजदूर परिवारों को सम्मान के साथ रोजगार मिला डॉ. वेरका ने बताया कि यह कानून कांग्रेस सरकार की दूरदर्शी सोच का परिणाम है, जिसने करोड़ों गरीब और मजदूर परिवारों को सम्मान के साथ रोजगार दिया। उन्होंने याद दिलाया कि प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल में संसद ने सर्वसम्मति से मनरेगा कानून पारित किया था। इसे एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी कदम बताते हुए डॉ. वेरका ने कहा कि इसने वंचित, शोषित, गरीब और अति गरीब ग्रामीण परिवारों के लिए रोजी-रोटी का एक मजबूत आधार तैयार किया। मनरेगा ग्रामीण भारत की जीवनरेखा है, जिसने ग्रामीणों को रोजगार का कानूनी अधिकार प्रदान किया। पलायन पर प्रभावी रोक लगाई उन्होंने आगे कहा कि यह कोई भीख या अस्थायी राहत नहीं थी, बल्कि इसने रोजगार की तलाश में गांव छोड़कर शहरों की ओर होने वाले पलायन पर प्रभावी रोक लगाई। इस योजना से ग्राम पंचायतों को मजबूती मिली और स्थानीय स्तर पर विकास से जुड़े फैसले संभव हुए। मनरेगा के तहत सड़कों, जल संरक्षण, स्कूलों और आंगनवाड़ी भवनों जैसी टिकाऊ परिसंपत्तियों का निर्माण हुआ, जिससे ग्रामीण बुनियादी ढांचा सशक्त बना। डॉ. वेरका ने यह भी उल्लेख किया कि कोविड-19 जैसे गंभीर संकट के समय मनरेगा गरीब वर्ग के लिए संजीवनी साबित हुआ। उन्होंने कहा कि यह महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज के सपनों को साकार करने की दिशा में एक ठोस और व्यावहारिक कदम था।


