मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर आराध्यदेव ठाकुर केशवराय के मंदिर में विशेष उत्सव का आयोजन किया गया। भगवान का नयनाभिराम श्रृंगार कर उन्हें नई पोशाक धारण करवाई गई और केसर इत्र से सजाया गया। युवाचार्य पंकज पाराशर ने मकर संक्रांति के महत्व को समझाते हुए बताया कि यह वर्ष की सबसे बड़ी संक्रांति है। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के कारण इस दिन किए गए दान-पुण्य का फल पूरे वर्ष के ग्यारह महीनों के बराबर होता है। यह भगवान कृष्ण और गौ माता की आराधना का विशेष पर्व भी है। इस अवसर पर मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की गई, जिसमें भगवान को लड्डू, फीणी और हलवे का भोग लगाया गया। साथ ही, मकर संक्रांति के त्योहार को ध्यान में रखते हुए भगवान को पतंग और डोर भी अर्पित की गई। भक्तों ने अपनी राशि अनुसार ग्रह दशा और दिनमान दशा के निवारण के लिए विशेष दान-पुण्य भी किया।


