अमरकंटक नर्मदा तट के संत प्रयागराज महाकुंभ मकर संक्रांति अवसर पर लगाई गंगा जी में डुबकी,
अमरकंटक। मां नर्मदा जी की उद्गम स्थली पवित्र नगरी अमरकंटक में मकर संक्रांति के पावन अवसर पर पतित पावनी मां नर्मदा नदी में हजारों लोगों ने नर्मदा स्नान कर मंदिर दर्शन किए और पूजा आराधना कर मां भगवती से दुआओं हेतु मंदिरों में माथा टेका गया। श्रद्धालुओं, पर्यटक अमरकंटक के अन्य स्थलों का भ्रमण कर आनंद का अनुभव प्राप्त किए। इसी तरह मकर संक्रांति के महापर्व पर प्रयागराज के संगम पर महाकुंभ में प्रथम अमृत स्नान में अमरकंटक के संत महात्मा भी पहुंच शाही गंगा स्नान किए। प्राप्त जानकारी अनुसार महाकुंभ प्रयागराज में पवित्र नगरी अमरकंटक के संत परम तपस्वी वीतराग बाबा कल्याण दास जी महाराज, महामृत्युंजय आश्रम के संत महामंडलेश्वर स्वामी हरिहरानंद जी महाराज तथा शांति कुटी आश्रम के श्रीमहंत स्वामी रामभूषण दास जी महाराज ने अपने-अपने शिष्यों, भक्तों, अनुयायियों तथा श्रद्धालुओं के साथ आज मकर संक्रांति के पावन अवसर पर प्रयागराज में शाही सवारी करते हुए गाजे बाजे, जयकारो की अलख लगाते, विशाल जुलूस के साथ पतित पावनी पुण्य सलिला मां गंगा के पवित्र त्रिवेणी संगम में पुण्य की डुबकी लगाई। स्नान, दर्शन, पूजन अर्चना की गई। इस दौरान इन संतों के साथ भारी संख्या में अन्य साधु संत, आचार्यगण, पुरोहित, पंडित तथा भक्त, श्रद्धालुगण साथ रहे। त्रिवेणी संगम स्नान में अनेक अखाड़ों के संत शामिल भी हुए। उसी तरह अमरकंटक के संतो ने भी अपने अपने अखाड़ों के साथ शामिल होकर प्रयागराज में शाही स्नान किया। शाही स्नान के दौरान मार्ग के किनारे उपस्थित श्रद्धालुजनों और भक्तगणों ने शाही स्नान के लिए जा रहे संतों पर पुष्पों की वर्षा कर स्वागत करते रहे तथा जयकारों की ध्वनि से पूरा वातावरण गुंजायमान हो रहा था। लोगो ने संतो से विनम्र प्रार्थना कर आशीर्वचन भी ले रहे थे तथा संतों ने भी भक्त और श्रद्धालुओं के उपस्थित जनसमूह को हृदय से आशीर्वाद देते रहे। शाही स्नान के दौरान मार्ग के दोनों ओर लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं ने साधु संतों का जय घोष करते रहे, भजन कीर्तन भी करते नजर आए। प्रयागराज का महाकुंभ के शाही स्नान का यह नजारा देखने लायक था। प्रयागराज के विशाल महाकुंभ का मकर संक्रांति के साथ 45 दिनों तक चलने वाला कल्पवास का धार्मिक आयोजन मकर संक्रांति से प्रारंभ हो गया। अभी इसके साथ ही चार और प्रमुख तिथियो पर स्नान किया जाएगा जो आगे 29, 03, 12, 26 पर होना सुनिश्चित किया हुआ है। अमरकंटक के संत भी अपने-अपने अखाड़ा के साथ यात्रियों भक्त श्रद्धालुओं के लिए टेंट तंबू लगाकर कल्पवास के साथ कथा, पूजन, सत्संत, हवन के साथ विशाल भंडारा किया जा रहा है।


