राजनांदगांव के पनेका में बेटियों ने मां को दी मुखाग्नि:4 बेटियों ने निभाया अंतिम कर्तव्य, बौद्ध समाज की समानता का उदाहरण

राजनांदगांव जिले के ग्राम पनेका में सामाजिक रुढ़ियों को तोड़ते हुए बेटियों ने अपनी मां को अंतिम विदाई दी। दिवंगत माता देवला नोन्हारे (73 साल) के अंत्येष्टि संस्कार में उनकी चारों पुत्रियों ने मिलकर मुखाग्नि देकर समाज को एक नया संदेश दिया। दिवंगत देवला नोन्हारे के अंतिम संस्कार के दौरान उनकी चार पुत्रियां आशा, सुमन, अनिता और कुमारी सरिता नोन्हारे ने संयुक्त रूप से मुखाग्नि दी। यह दृश्य मातृभक्ति, साहस और कर्तव्यबोध का जीवंत प्रतीक बना। ‘इस काम ने सामाजिक चेतना को मजबूत किया’ इस प्रेरणादायक घटना की जानकारी बौद्ध कल्याण समिति के अध्यक्ष बुद्ध प्रकाश गायकवाड ने दी। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कार्य बौद्ध समाज की प्रगतिशील सोच और मानवतावादी मूल्यों को दर्शाते हैं। बौद्ध समाज में बेटा-बेटी के भेदभाव को नकारते हुए इस काम ने सामाजिक चेतना को मजबूत किया। अंत्येष्टि के दौरान उपस्थित समाज के लोगों ने इस पहल को गर्व, सम्मान और श्रद्धा के साथ देखा। समाजजनों का कहना था कि बेटियों द्वारा किया गया यह कार्य आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मजबूत प्रेरणा बनेगा और समाज में समानता की सोच को और बल देगा। इस अवसर पर यह स्पष्ट हुआ कि बदलते समय में बेटियां हर क्षेत्र में अपनी जिम्मेदारी और सामर्थ्य का प्रमाण दे रही हैं। यह घटना समाज में व्याप्त रूढ़ मान्यताओं को तोड़ते हुए समान अधिकार और कर्तव्य की भावना को मजबूत करती है। यह घटना बौद्ध समाज की समतामूलक सोच और मानवीय मूल्यों को दर्शाती है। यह आयोजन बौद्ध धम्म की उस मूल भावना को दर्शाता है, जिसमें नर-नारी समानता, करुणा, सम्मान और न्याय को सर्वोच्च स्थान दिया गया है।

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