एक साल से सड़कों की गुणवत्ता जांच ठप:अफसरों के पास एक जोन से दूसरे जोन में जाने की फुर्सत ही नहीं

छत्तीसगढ़ में सड़कों की बदहाली की बड़ी वजह पीडब्ल्यूडी अफसरों की सुस्ती और अव्यवस्थित व्यवस्था बनती जा रही है। हालात यह हैं कि विभागीय अधिकारियों के पास समय नहीं होने के कारण सड़कों की गुणवत्ता जांच ही नहीं हो पा रही है। नतीजतन कई जिलों में नई बनी सड़कें भी कुछ ही दिनों में उखड़ने लगी हैं। दरअसल, लोक निर्माण विभाग ने सड़कों की गुणवत्ता जांच के नियमों में बदलाव किया है। नए प्रावधान के तहत हर जोन में एक जांच टीम गठित की गई है, जिसमें प्रमुख अभियंता, मुख्य अभियंता और कार्यपालन अभियंता शामिल हैं। ये टीमें अपने जोन के बजाय दूसरे जोन की सड़कें जांचेंगी। लेकिन हकीकत यह है कि अपने-अपने जोन में काम के अत्यधिक दबाव के चलते अधिकारी दूसरे जोन में जाकर निरीक्षण के लिए समय ही नहीं निकाल पा रहे हैं। पीडब्ल्यूडी सूत्रों के अनुसार टीम गठन के बावजूद पिछले करीब 8 महीनों से सड़कों की गुणवत्ता जांच लगभग ठप है। निगरानी के अभाव में विभाग की प्रयोगशालाएं भी लंबे समय तक निष्क्रिय रहीं। इन लैब में सीमेंट, रेत, गिट्टी और बिटुमिन जैसी निर्माण सामग्री की नियमित जांच नहीं हो सकी, जिससे सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। फैक्ट फाइल कुछ ही घंटों में उखड़ गई सड़क
20 दिसंबर 2025 को अंबिकापुर NH-43 में 6 करोड़ की लागत से 600 मीटर में सड़क मरम्मत का काम किया गया, पर अगले दिन उखड़ गया। जांच के बाद चीफ इंजीनियर ने सब इंजीनियर नवीन सिन्हा को सस्पेंड कर दिया है। 82 लाख की सड़क 24 घंटे में ही ध्वस्त
मोवा ओवरब्रिज की मरम्मत का काम इसी साल 3 से 8 जनवरी तक चला। 82 लाख की लागत से मरम्मत हुई सड़क दूसरे ही दिन उखड़ गई। पीडब्ल्यूडी मंत्री अरुण साव तत्काल ईई, एसडीओ सहित 3 सब इंजीनियर को सस्पेंड कर दिया। बीजापुर में 52.40 किमी सड़क खराब
नेलसनार-कोडोली–मिरतुल-गंगालुर सड़क निर्माण में गड़बड़ियों की पुष्टि हुई है। त्रुटिपूर्ण मूल्यांकन प्रतिवेदन देने एवं ठेकेदार, निर्माण एजेंसी के साथ मिलकर भ्रष्टाचार करने के मामले में तीन अधिकारी को निलंबित कर दिया गया। साल 2025 में ही 400 किमी बनाई गई सड़क
पीडब्ल्यूडी ने इस वित्तीय वर्ष में करीब 400 किमी नई सड़क का निर्माण किया है। पिछले नियम के मुताबिक हर छोटे बड़े प्रोजेक्ट भवन, सड़क आदि की जांच पहले कांट्रेक्टर की टीम करवाती थी। इसके बाद डिवीजन की टीम अपने स्तर पर जांच करती थी। इसके बाद थर्ड पार्टी गुणवत्ता की जांच करती थी, लेकिन पीडब्ल्यूडी ने एक साल पहले इस नियम को बदल दिया और जांच का जिम्मा अफसरों की टीम को दे दिया। इस कारण सड़कों के गुणवत्ता की रेगुलर जांच नहीं हो पा रही है। नए नियम के मुताबिक सड़क या भवन निर्माण के बाद यदि भवन या फिर सड़क के खराब होने की शिकायत आती है तो इस पर मुख्यालय में बैठे ईएनसी जांच के लिए आदेश देगा। अनदेखी… लैब में 1 साल से बंद
रायपुर स्थित नीर भवन में पीडब्ल्यूडी की केंद्रीय प्रयोगशाला है। यह पिछले एक साल से बंद है। इससे सड़कों और भवनों की गुणवत्ता की जांच नहीं हो पा रही है। दावा… रेगुलर मॉनिटरिंग होगी
सड़कों की जांच को लेकर पीडब्ल्यूडी का तर्क था कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता बेहतर होगी। बड़े-बड़े कामों की रेगुलर मॉनिटरिंग होगी। जिम्मेदार अफसर भी मौके पर जाएंगे। जिम्मेदार बोले… गुणवत्ता सही, जांच की जरूरत नहीं
हमारे प्रदेश में सड़क की गुणवत्ता काफी अच्छी है। पेचवर्क, नवीनीकरण में सभी मापदंड पूरे किए जा रहे हैं। बनाए जाने वाली सड़कों की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। ऐसे में जांच की कोई आवश्यकता नहीं है।
– वीके भतपहरी, ईएनसी, पीडब्ल्यूडी

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