हिमाचल प्रदेश में एम्बुलेंस कर्मचारी यूनियन ने दो दिवसीय हड़ताल के दौरान दूसरे दिन भी मंडी जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने सरकार के पुतले की शव यात्रा निकाली और चौहटा में दहन किया। यूनियन के जिला प्रधान सुमित कपूर ने बताया कि मंडी जिले में हड़ताल शत-प्रतिशत सफल रही। बता दें कि, हिमाचल में 108 और 102 एम्बुलेंस सेवा में कार्यरत लगभग 1300 कर्मचारी नेशनल हेल्थ मिशन के तहत वर्ष 2022 में मेडस्वान फाउंडेशन कंपनी द्वारा नियुक्त किए गए थे। इससे पहले, ये सभी कर्मचारी वर्ष 2010 में जीवीके कंपनी द्वारा नियुक्त किए गए थे। जीवीके कंपनी ने कर्मचारियों को छंटनी भत्ता, ग्रेच्युटी और अन्य भत्ते नहीं दिए, जिस पर स्वास्थ्य मिशन मूकदर्शक बना रहा। कंपनी द्वारा कर्मचारियों उत्पीड़न करने का आरोप कर्मचारियों का आरोप है कि वर्तमान नियोक्ता कंपनी द्वारा लंबे समय से उनका शोषण किया जा रहा है। उन्हें निर्धारित न्यूनतम वेतन नहीं दिया जा रहा है और उनसे 12 घंटे ड्यूटी करवाई जाती है, लेकिन कंपनी ओवरटाइम का भुगतान नहीं करती है। हिमाचल हाईकोर्ट, लेबर कोर्ट, सीजीएम कोर्ट शिमला और श्रम कार्यालय के आदेशों के बावजूद उनका शोषण जारी है। यूनियन के माध्यम से अपनी मांगों के लिए आवाज उठाने पर कर्मचारियों को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है। कर्मचारियों ने पहले भी दो बार एक-एक दिन की हड़ताल की थी, लेकिन उसके बाद भी कंपनी ने न्यूनतम वेतन और ओवरटाइम का भुगतान नहीं किया। इसी कारण इस बार दो दिवसीय हड़ताल का आयोजन किया गया है। यूनियन ने राज्य सरकार द्वारा हड़ताल को कुचलने के लिए लगाए गए एस्मा कानून के निर्णय की कड़ी निंदा की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसी कर्मचारी को इस कानून के बहाने प्रताड़ित किया गया, तो यूनियन उसका कड़ा विरोध करेगी। कर्मचारियों ने यह भी कहा कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने को मजबूर होंगे।


