मेडिकल इमरजेंसी में गंभीर मरीजों को तुरंत एयर लिफ्ट करने के मकसद से मप्र में शुरू की गई पीएम श्री एयर एंबुलेंस सेवा वक्त पर राहत नहीं दे पा रही। एयर एंबुलेंस के लिए मरीजों को 3-3 दिन इंतजार करना पड़ रहा है। इसके विपरीत निजी एयर एंबुलेंस 6 से 12 घंटे के भीतर उपलब्ध हो रही है। इसका खर्च 8 लाख रुपए प्रति उड़ान तक आता है, लेकिन आम आदमी के लिए यह भारी खर्च उठाना संभव नहीं है। इसी को देखते हुए राज्य सरकार ने जून 2024 में पीएम श्री हवाई एंबुलेंस सेवा शुरू की थी। इसके तहत अब तक 109 मरीजों को एयरलिफ्ट किया जा चुका है, पर औसतन 40 लाख रु. प्रति मरीज तक भुगतान के बावजूद समय पर सेवा नहीं मिल पा रही है। इसका संचालन फिलहाल फ्लायओला कर रही है। कॉन्ट्रैक्ट और एसओपी में साफ लिखा है कि एयर एंबुलेंस के लिए तय A109E हेलीकॉप्टर और फिक्स्ड-विंग फ्लाइंग आईसीयू, दोनों हर समय यानी 24×7 स्टैंडबाय मोड पर मप्र में ही उपलब्ध रहेंगे। ताकि जरूरतमंद मरीज को तत्काल सुविधा मिल सके। लेकिन ऐसा हो नहीं रहा। कई बार मरीजों को एयरलिफ्ट करने के लिए फ्लायओला को विमान देश के अन्य हिस्सों से मंगाने पड़ते हैं। इससे गंभीर मरीजों को ले जाने में अनावश्यक देरी होती है। पहले चरण में इस सेवा का संचालन ICATT क्रिटिकल केयर एयर ट्रांसफर टीम ने किया। राज्य सरकार ने 2.50 करोड़ प्रतिमाह का तय भुगतान किया, चाहे विमान का उपयोग हुआ हो या नहीं। जुलाई 2025 से यह सेवा फ्लायओला (जेट सर्व एविएशन) को सौंप दी। भुगतान मॉडल वही रखा गया, पर राशि ₹2.87 करोड़ प्रतिमाह हो गई। मदद में देरी क्यों?… जब डिमांड आई तब मरीज तक पहुंचने की बजाय अन्य शहरों में उड़ान भर रहे विमान खंडवा : रोड से 4 घंटे का सफर, विमान के लिए 12 घंटे इंतजार रीढ़ की हड्डी में चोट वाले मरीज को चादर लपेट लिफ्ट किया ताराबाई (73) को 18 नवंबर को खंडवा से इंदौर एयरलिफ्ट किया। खंडवा से इंदौर की दूरी सड़क मार्ग से लगभग चार घंटे की है। एयर एंबुलेंस की मांग के लगभग 12 घंटे बाद विमान पहुंचा। अस्पताल में ली गई तस्वीरों में ताराबाई कुर्सी पर बैठी दिखाई देती हैं। एयरलिफ्ट के वक्त उन्हें एक चादर में लपेटकर विमान में ले जाया गया। ये तस्वीरें डॉक्टरों द्वारा बताए गए गंभीर स्पाइनल इंजरी के दावे पर सवाल खड़े करती हैं। क्या सिर्फ नंबर बढ़ाने के लिए भी इस सेवा का इस्तेमाल हो रहा है? देवास : विधायक की मां को जरूरत थी, मप्र में ही घूम रहा था विमान… तीसरे दिन पहुंचा देवास के बीजेपी विधायक आशीष शर्मा की मां की तबीयत गत 26 अक्टूबर को बिगड़ी तो परिवार ने एयर एंबुलेंस की मांग की। उसी दिन सभी औपचारिकताएं पूरी हो गईं, पर विमान नहीं मिल सका। 27 अक्टूबर को भी एयर एंबुलेंस नहीं आई। तीसरे दिन 28 अक्टूबर को विमान VT-RSN आया और उन्हें दिल्ली ले जाया गया। वहां पहुंचने के कुछ समय बाद उनका निधन हो गया। एयरपोर्ट अथॉरिटी व भोपाल एयरपोर्ट का रिकॉर्ड बताता है कि इसी दौरान विमान मप्र में उड़ान भर रहा था। एयरपोर्ट के रिकॉर्ड बता रहे सच
एयरपोर्ट्स अथॉरिटी के मुताबिक, जेट सर्व एविएशन देश के 133 नॉन-शेड्यूल्ड ऑपरेटर्स में है। इनके पास 3 हेलीकॉप्टर व 7 फिक्स्ड-विंग एयरक्राफ्ट हैं। भोपाल ATC के मुताबिक जेट सर्व के दो विमान 26 से 28 अक्टूबर के बीच मप्र में उड़ान भरते रहे। अन्य सरकारी उपयोग का भी प्रावधान… फ्लायओला के साथ हुए कॉन्ट्रैक्ट में यह प्रावधान भी है कि सरकारी अनुमति मिलने पर एयर एंबुलेंस को ‘अन्य सरकारी उपयोगों’ जैसे अफसरों की यात्रा या निरीक्षण के लिए भी लगाया जा सकता है। ऐसे में आशंका है कि जिस वक्त पेशेंट को जरूरत हो, उस वक्त विमान किसी अन्य सरकारी यात्रा पर हो। शर्तों का उल्लंघन हुआ तो जांच कर कार्रवाई करेंगे ^एसओपी में साफ है कि दोनों एयर एम्बुलेंस मप्र में 24×7 स्टैंडबाय पर रहनी चाहिए। अगर यह तथ्य सामने आया है कि ऐसा नहीं हो रहा है, तो जांच करेंगे। सही पाए जाने पर कार्रवाई होगी। हम वैसे भी उन्हें पैसा दे रहे हैं और अभी सेवा का उपयोग लगभग 37% है, इसलिए जरूरत पड़ने पर अन्य कार्य में उपयोग का प्रावधान रखा गया। हालांकि अब तक एक भी गैर-चिकित्सीय उपयोग नहीं हुआ है।’
तरुण राठी, स्वास्थ्य आयुक्त, मप्र कंपनी ने स्वीकारा- हमारे प्लेन आते-जाते रहते हैं हमारे ऑपरेशन्स देश के कोने-कोने में हैं। किसी भी समय कितने एयरक्राफ्ट एयर एम्बुलेंस के रूप में उपयोग के लिए तैयार हैं, यह बताना मुश्किल है। हमारे प्लेन आते-जाते रहते हैं।’
-एस. राम ओला, एमडी, फ्लायओला


