नशे में धुत परिजनों ने डॉक्टरों-स्टाफ से की मारपीट:गौरेला अस्पताल में सड़क हादसे के बाद हंगामा, सिविल सर्जन की शिकायत पर मामला दर्ज

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में नशे में धुत परिजनों ने डॉक्टरों-स्टाफ से मारपीट की है। 26 दिसंबर की रात मरवाही के भर्रीडांड में हुए सड़क दुर्घटना के घायल मरीजों को जिला अस्पताल गौरेला लाया गया था। यहां डॉक्टरों ने एक मरीज दुर्गेश रजक को मृत घोषित कर दिया, जबकि ईश्वर और विवेक को प्राथमिक उपचार के बाद स्थिर बताया गया। देर रात नशे की हालत में पहुंचे अटेंडरों ने डॉक्टरों पर मरीजों को न देखने का आरोप लगाते हुए गाली-गलौज की और पीट दिया। इलाज की प्रक्रिया में दखल देने का आरोप आरोप है कि अटेंडरों ने विशेष रूप से महिला डॉक्टरों को निशाना बनाया और इलाज की प्रक्रिया में दखल देते हुए ऑक्सीजन लगाने व वार्ड में खड़े रहने का दबाव बनाया। हंगामा बढ़ने पर जब वार्ड बॉय और सुरक्षा गार्ड ने भीड़ को समझाने की कोशिश की, तब आरोपियों ने अस्पताल कर्मियों से हाथापाई और मारपीट की। इस दौरान सुरक्षाकर्मी व स्टाफ के कई लोगों को चोटें आईं और अस्पताल का माहौल दहशत में था। अस्पताल प्रबंधन की शिकायत पर मामला दर्ज आरोपी पक्ष के लोगों ने डॉक्टरों और कर्मचारियों को अश्लील गालियां दीं और देख लेने और जान से मारने की धमकी भी दी। इसके बाद पुलिस सहायता के लिए डायल 112 को सूचना दी गई। प्रार्थी डॉ. देवेंद्र सिंह पैकरा, सिविल सर्जन एवं मुख्य अस्पताल अधीक्षक की लिखित रिपोर्ट पर आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 296, 351(3), 115(2), 3(5) के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है। कानूनी कार्रवाई की तैयारी में जुटी पुलिस इस प्रकरण को छत्तीसगढ़ चिकित्सा सेवक तथा चिकित्सा सेवा संस्थान (हिंसा तथा संपत्ति की क्षति या हानि की रोकथाम) अधिनियम 2010 के उल्लंघन के रूप में भी दर्ज किया गया है। यह अधिनियम डॉक्टरों और अस्पताल संपत्ति के खिलाफ हिंसा को संज्ञेय और गंभीर अपराध मानते हुए कठोर दंड का प्रावधान करता है। थाना गौरेला पुलिस ने रिपोर्ट के आधार पर अपराध दर्ज कर मामले को विवेचना में लिया है। पुलिस डॉक्टरों एवं अस्पताल स्टाफ के बयान, सीसीटीवी फुटेज और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रही है। जिला अस्पताल प्रबंधन ने घटना की निंदा करते हुए कहा है कि इस तरह की हिंसक घटनाएं चिकित्सा सेवाओं को प्रभावित करती हैं और भविष्य में डॉक्टरों व स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाए जाने की आवश्यकता है।

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