डोंगरगढ़ में जर्जर-सड़क को PWD मंत्री ने बताया चलने योग्य:नाराज ग्रामीणों ने उठाए सवाल, बोटेपार-खजरी तक 2.5km गड्ढे; राशि जारी पर काम अटका

छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत घुमका ब्लॉक में बोटेपार से खजरी तक की लगभग ढाई किलोमीटर लंबी सड़क ग्रामीणों के लिए बड़ी समस्या बन गई है। कागजों में यह सड़क पूरी हो चुकी है, लेकिन जमीनी हकीकत में यह पूरी तरह जर्जर है और गहरे गड्ढों से भरी है। इस मामले में विधानसभा में दिए PWD मंत्री के जवाब पर भी सवाल उठ रहे हैं। जिसमें उन्होंने कहा है कि सड़क चलने योग्य है। यह सड़क सालों पहले केवल गिट्टी और मुरूम डालकर छोड़ दी गई थी। ग्रामीण नारायण वर्मा के अनुसार, लगभग 20-25 साल पहले जब बोटेपार और खजरी एक ही पंचायत थे, तब इस पर गिट्टी-मुरूम डलवाया गया था, लेकिन उसके बाद से कोई स्थायी निर्माण कार्य नहीं हुआ है। समय के साथ यह रास्ता पूरी तरह जर्जर हो गया है। ग्रामीणों के मुताबिक, यह मुरूम गिट्टी वाला रास्ता था। कभी सड़क बनी ही नहीं। बारिश में तो कोई जा ही नहीं सकता। ग्रामीण बोले- सड़क पर जगह-जगह गहरे गड्ढे बने ग्रामीणों का कहना है कि सड़क पर जगह-जगह गहरे गड्ढे बन चुके हैं, जिससे रोजाना दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। बरसात के दिनों में स्थिति और भी खराब हो जाती है, जब गड्ढों में पानी भर जाने से सड़क का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है। ग्रामीण सुशीला बाई ने बताया कि इसी सड़क पर फिसलने से उनका पैर टूट गया था, जिसके कारण उन्हें दो महीने तक बिस्तर पर रहना पड़ा। इस सड़क की बदहाली का सबसे अधिक असर किसानों पर पड़ रहा है। बोटेपार के किसान अपनी धान की फसल बेचने के लिए लगभग 6 किलोमीटर दूर पटेवा सोसाइटी जाते हैं। खराब सड़क के कारण ट्रैक्टर ले जाना जोखिम भरा होता है, इसलिए उन्हें घुमका होकर लंबा रास्ता तय करना पड़ता है। इससे उनके समय, ईंधन और मेहनत का नुकसान होता है। विधायक बोली- सड़क चलने योग्य है यह मामला विधानसभा तक भी पहुंचा। डोंगरगढ़ विधायक हर्षिता बघेल ने सड़क निर्माण को लेकर सदन में सवाल उठाया था। उन्होंने सवाल पूछा कि बोटेपार से खजरी मार्ग बजट में शामिल था। स्वीकृति के बाद टेंडर होने के बाद आज ये राशि कहा लंबित है। जवाब में PWD मंत्री अरूण साव ने कहा कि विधायक ने जिन 3 सड़कों का उल्लेख किया है। निविदा हो गया था। निविदा की प्रक्रिया लंबित है। सड़कों का मरम्मत किया गया है। ये सड़क चलने योग्य है और कागजों में इसे पूरा बताया गया है। आने वाले समय में सड़कों की नवीनीकरण की आवश्यकता होगी तो निश्चित रूप से उस पर काम करेंगे। विधायक ने कहा सड़क चौड़ीकरण की स्वीकृति मिली थी। राशि जारी होने के बाद रोक दिया गया है। विभाग में यदि राशि है तो काम होना चाहिए। इसे रोका क्यों गया। हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि कागजों में बनी सड़क और जमीन की सच्चाई में बड़ा अंतर है। ग्रामीणों के अनुसार, सरकार के दावों और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा विरोधाभास है। बोटेपार-खजरी के लोग आज भी एक सुगम सड़क के इंतजार में हैं।

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