मंदसौर में शनिवार को नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया। लोक अदालत में कुटुंब न्यायालय के 101 प्रकरणों का निरकारण किया गया। इसमें 30 मामलों में पति-पत्नी के बीच समझौता करवाया गया।पति-पत्नी के विवाद के कुछ खास रोचक मामले में सामने आए। साथ में सेल्फी नहीं लेने से नाराज थी पत्नी नेशनल लोक अदालत ने सेल्फी नहीं लेने पर रूठी पत्नी को पति के साथ भगवान पशुपतिनाथ मंदिर भेजकर सेल्फी खिचवाने के आदेश दिए। जिसके बाद पति-पत्नी में सुलह हो गई। दरअसल, पायल (बदला हुआ नाम) और महेंद्र (बदला हुआ नाम) की 21 दिसंबर 2020 को छज्जूखेड़ा गांव में शादी हुई थी। पायल चार-पांच दिन अपने ससुराल में रही। उसके बाद वह मायके आ गई। पति उसे लेने वापस गया तो पत्नी और उसके परिजनों ने झगड़ा कर पति को भगा दिया। दोनों के बीच चार साल से चल रहे विवाद में पति ने कई बार प्रयास किया लेकिन पत्नी साथ रहने को तैयार नहीं हुई। इसके बाद महेंद्र ने तलाक के कोर्ट की शरण ली। उधर पत्नी पायल ने भी भरण पोषण का केस दायर कर दिया। नेशनल लोक अदालत में गंगाचरण दुबे कुटुंब न्यायालय ने दोनों के बीच संवाद स्थापित किया तो पता चला कि पति महेंद्र अपनी पत्नी पायल के साथ सेल्फी नहीं लेता था। वह अकेले सेल्फी लेकर सोशल मीडिया पर अपलोड करता था। वहीं, पत्नी को मंदिर नहीं ले जाना और अन्य कार्यक्रमों में उसे साथ नहीं ले जाने पर भी पत्नी नाराज होकर मायके चली गई थी। कोर्ट ने दोनों के बीच समझौता करवाकर पति को आदेश दिया कि वह पत्नी को पशुपतिनाथ दर्शन करवाने ले जाए और उसके साथ सेल्फी भी ले। पति ने कोर्ट के आदेश का पालन करने की बात कही। उसने कोर्ट से वादा किया कि अब वह पत्नी को मंदिर और अन्य जगह घुमाने ले जाएगा और सेल्फी भी लेगा। इसके बाद पत्नी खुश हो गई और पति के साथ फिर से रहने को तैयार हो गई। एकपक्षीय तलाक निरस्त कर पति-पत्नी का घर बसाया दूसरे मामले में कोर्ट ने पति-पत्नी के बीच समझौता करवाकर तलाक निरस्त करवाया। मामले में सेना पदस्थ पति ने कोर्ट में पत्नी के उपस्थित नहीं होने पर 5 महीने पहले एक पक्षीय तलाक ले लिया था। पत्नी ने कोर्ट में पेश होकर कहा कि उसके पति ने धोखा कर तलाक लिया है। पति ने उसे फोन पर साथ रखने का आश्वासन दिया था और कहा था कि विवाह विच्छेद की याचिका वापस ले ली है। उसने पत्नी को धोखा देते हुए कोर्ट से एकपक्षीय निर्णय ले लिया। पत्नी को भ्रम में रखने के लिए पत्नी के खाते में कुछ राशि भी ट्रांसफर की। कॉल और मैसेज कर विवाह विच्छेद के प्रकरण में उसे बहकावे में रखा। फौजी पति ने कोर्ट को बताया कि जब वह छुट्टियों में घर आता है, तब पत्नी ससुराल आती है। छुट्टियां खत्म होते ही पत्नी वापस मायके चली जाती है। जिससे उसकी विधवा मां को अकेले परेशान होना पड़ता है। कोर्ट ने बहू को कर्तव्यों की समझाइश दी और नाराज पति को सुलह के लिए तैयार किया। दोनों के बीच मध्यस्थता करवाई तो पता चला कि पत्नी महिला बाल विकास विभाग में आंगनबाड़ी के पद पर कार्यरत है। इससे वह ससुराल नहीं आना चाहती। कोर्ट ने महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों को परिवार बचाने हेतु नियमानुसार आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के नियोजन को उसकी ससुराल पर सुनिश्चित कराए जाने के लिए रिक्वेस्ट भी भेजा है। इससे दोनों के बीच सुलह हो गई। कमांडिंग ऑफिसर से बात कर पति को क्वार्टर दिलाने का अनुरोध किया तीसरे मामले में गंगाचरण दुबे की अदालत ने पवन राठौड़ (बदला हुआ नाम) को मैदानी इलाके में तैनाती के दौरान भी अपनी पत्नी को साथ रखने का आदेश दिया। इसके लिए कोर्ट ने कमांडिंग ऑफिसर कर्नल कुलदीप से फोन पर बात की और उनसे पवन को क्वार्टर मुहैया कराने का अनुरोध किया। दरअसल, प्रियंका (परिवर्तित नाम) और पवन राठौर (परिवर्तित नाम) का 16 फरवरी 2021 को राजस्थान के चित्तौड़ में विवाह हुआ। शादी के बाद प्रियंका छोटी-छोटी बातों पर झगड़ा करने लगी। पति के समझाने पर भी पत्नी के व्यवहार में कोई परिवर्तन नहीं आया तो पति ने एसडीएम कोर्ट में अर्जी लगाई। इसके बाद भी पत्नी तैयार नही हुई। पति ने कोर्ट में तलाक की याचिका लगाई। पत्नी ने भी भरण पोषण की याचिका लगा दी। लोक अदालत में कोर्ट ने पति-पत्नी से संवाद किया तो पता चला कि पत्नी की शिकायत यह यही कि पति अपनी मैदानी पोस्टिंग पर अपने साथ नहीं रखता। इसी नाराजगी के चलते पत्नी मायके में रह रही थी। समझौते के दौरान कोर्ट ने पति के कमांडिंग ऑफिसर कर्नर कुलदीप से कॉल पर चर्चा कर पति को पोस्टिंग पर क्वार्टर देने का निवेदन किया। जिस पर कर्नल ने आश्वासन दिया कि पति की पोस्टिंग मैदानी क्षेत्र में होते ही पति को कॉर्टर दिया जाएगा। पति ने न्यायालय के आदेश का पालन करने की बात कही। जिसके बाद पत्नी नाराजगी छोड़कर पति के साथ जाने को तैयार हो गई।


