सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने 27 दिसंबर 2025 को एमपी पीएमटी-2011 परीक्षा (व्यापम घोटाला) में फर्जीवाड़ा और धोखाधड़ी के एक मामले में 12 आरोपियों को दोषी ठहराया है। न्यायालय ने प्रत्येक आरोपी को 5 वर्ष का सश्रम कारावास और 6,000 रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है। दोषी करार दिए गए आरोपी
दोषी ठहराए गए आरोपियों में अभ्यर्थी, फर्जी परीक्षार्थी (इम्पर्सोनेटर) और बिचौलिए शामिल हैं। इनमें आशीष यादव उर्फ आशीष सिंह, सत्येंद्र वर्मा, धीरेंद्र तिवारी, बृजेश जायसवाल, दुर्गा प्रसाद यादव, राकेश कुर्मी, नरेंद्र चौरसिया, अभिलाष यादव, खूबचंद राजपूत, पवन राजपूत, लखन धंगर और सुंदरलाल धंगर शामिल हैं। कैसे सामने आया मामला
यह मामला शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय इंदौर के उप प्राचार्य की शिकायत पर सामने आया। शिकायत में व्यापम द्वारा आयोजित एमपी पीएमटी-2011 परीक्षा के दौरान फर्जी परीक्षार्थी पकड़े जाने की जानकारी दी गई थी। 24 जुलाई 2011 को सत्येंद्र वर्मा को आशीष यादव उर्फ आशीष सिंह के स्थान पर परीक्षा देते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया था। इसके बाद थाना तुकोगंज इंदौर में FIR दर्ज की गई। शुरुआत में राज्य पुलिस ने दो आरोपियों के खिलाफ चालान पेश किया था। बाद में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर मामला सीबीआई को सौंपा गया, जहां इसे दोबारा पंजीबद्ध कर विस्तृत जांच की गई। सीबीआई जांच में यह सामने आया
सीबीआई जांच में सामने आया कि एमपी पीएमटी-2011 परीक्षा में बिचौलियों के संगठित नेटवर्क के जरिए फर्जी परीक्षार्थियों की व्यवस्था की गई थी। उन्हें इंदौर लाकर होटलों में ठहराया गया और फर्जी दस्तावेजों व एडमिट कार्ड के जरिए परीक्षा दिलवाई गई। जांच के दौरान मिले दस्तावेजी साक्ष्य, होटल रिकॉर्ड और आरोपियों के खुलासों से अभ्यर्थियों, फर्जी परीक्षार्थियों और बिचौलियों की आपराधिक साजिश की पुष्टि हुई।


