जयपुर के जवाहर कला केंद्र में शहर की वरिष्ठ चिकित्सा विशेषज्ञ रेडियोलाजिस्ट डॉ. सुषमा महाजन के चित्रों की 3-दिवसीय प्रदर्शनी ‘वाइब्रेंट ह्यूज’ का कला समीक्षकों और कला प्रेमियों ने अवलोकन किया। रविवार को शुरू हुई चित्र प्रदर्शनी का समापन मंगलवार शाम को हुआ । प्रदर्शनी का उद्घाटन पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त और प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव सुनील अरोड़ा ने किया । इस अवसर पर जयपुर पुलिस आयुक्त बीजू जॉर्ज जोसफ सहित कई नामी चित्रकार और कला प्रेमी उपस्थित थे। अरोड़ा ने चित्रों को बारीकी से देखा और एक-एक चित्र के कलात्मक पहलुओं और उनके संदेशों पर विस्तार से चर्चा की। इस अवसर पर अरोड़ा ने डॉ. महाजन की कलाकृतियों का अवलोकन करते हुए कहा कि वे अभिभूत हैं, ऐसी कला को निहार कर उन्होंने कहा कि चिकित्सा के क्षेत्र में होते हुए भी वाटर कलर्स की ऐसी कलाकृतियां, जो कि संवेदनाओं के दार्शनिक चिंतन को दर्शाती हुई है जो अलौकिक है।
इस अवसर पर मौजूद जयपुर पुलिस आयुक्त बीजू जॉर्ज जोसेफ ने कलाकृतियों को निहारते हुए कहा कि ऐसी जीवंत कलाकृतियां निश्चित तौर पर जीवन में रंगों के संतुलन के साथ आंतरिक स्थायित्व एवं अनुशासन को दर्शाती हैं। प्रदर्शनी में 3 दिन तक लगातार कला-प्रेमियों का तांता लगा रहा । इनमें विश्व प्रतिष्ठित चित्रकार गोपाल स्वामी खेतांची, फिल्म कलाकार और निर्देशक अशोक बांठिया, सिद्धहस्त कलाकार एनएल वर्मा, जाने माने चित्रकार विद्यासागर उपाध्याय, पत्रकार एवं समीक्षक विनोद भारद्वाज, दैनिक भास्कर के नेशनल एडिटर लक्ष्मी प्रसाद पंत, संगीत नाटक अकादमी, नई दिल्ली के गगन मिश्रा, ललित कला अकादमी के सचिव रजनीश हर्ष, पूर्व सचिव एवं कलाकार एसएस खंगारोत, विनय शर्मा, कैलाश चंद शर्मा, नाथुलाल वर्मा, मनीष शर्मा, सौम्या शर्मा, सुरेन्द्र सोनी, महात्मा गांधी चिकित्सा संस्थान के चेयरमैन डॉ. विकास स्वर्णकार सहित जयपुर शहर में कला जगत की नामचीन हस्तियों ने भी शिरकत की. प्रतिष्ठित चित्रकार गोपाल स्वामी खेतांची ने कहा कि चिकित्सा जैसे अति व्यस्त पेशे में रहते हुए डॉ. महाजन ने चित्रों के माध्यम से अपने भावों को इतने सुन्दर तरीके से प्रस्तुत किया है. यह दूसरे पेशेवर लोगों के साथ-साथ कलाकारों के लिए भी प्रेरणादायी है। जवाहर कला केन्द्र की अलंकार दीर्घा में आयोजित प्रदर्शनी को बड़ी संख्या में ख्यात चित्रकारों और कला विवेचकों ने वाटर कलर के माध्यम से तैयार चित्रों का बेजोड़ संकलन बताया। उन्होंने कहा कि परिंदे, पशु, स्थापत्य, प्रकृति, सामाजिक जीवन, गलियां, पहाड़, बर्फ, स्त्री जीवन, जैसे अनेक अभिनव पक्षों को संयोजित करते चित्र एक अलग ही दुनिया का प्रतिबिंब दर्शक के सामने ले आते हैं. चित्रों की विविधता के साथ उनकी प्रस्तुति की भी एक खासियत यह है कि दर्शक भी उनके साथ एकाकार होकर अपने आप को उन्हीं का हिस्सा समझने लगता है। डॉ. सुषमा महाजन ने अपने चिकित्सकीय पेशे के समानान्तर इस विधा में हासिल नई उपलब्धि पर स्वयं कहा कि, “हमें भागदौड़ के जीवन में प्रकृति की सुन्दरता को भी जीना चाहिए. मैंने अपनी पेंटिंग्स के जरिए यह समझा है और मेरा सन्देश भी यही है कि हमारे आसपास की प्रकृति और हमारी विरासत बहुत सुन्दर है।
डॉ. महाजन द्वारा प्रदर्शनी में प्रदर्शित सभी 54 चित्र कैनवास पर वाटरकलर (जल रंग) के माध्यम से बनाए गए हैं. चिकित्सा पेशे में समय की तंगी की बावजूद ये चित्र लगभग 2 वर्ष की अवधि में बनाए गए हैं। इससे पहले जयपुर में 4 बार और दिल्ली के इंडिया हैबिटैट सेंटर में 2 बार पहली भी डॉ. महाजन के चित्रों की प्रदर्शनियां लगाई जा चुकी हैं।


