प्राकृतिक संसाधनों के शोषण से हो रहा जलवायु परिवर्तन

भास्कर संवाददाता | बड़वानी मंथन अध्ययन केंद्र द्वारा जल प्रबंधन और जैविक खेती पर आयोजित संवाद में पानी और भूमि जैसे महत्‍वपूर्ण संसाधनों को जीवन के लिए जरूरी बताते हुए इनके संरक्षण का आह्वान किया। वक्ताओं ने जल जीवन मिशन, नहरी सिंचाई और जैविक खेती की समस्‍याओं और उनके निराकरण के प्रयास पर चर्चा की। संवाद के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेत्री मेधा पाटकर ने कहा- प्राकृतिक संसाधनों के शोषण के कारण जलवायु परिवर्तन के चलते बेमौसम बरसात और अन्य आपदाओं से देशभर में किसानों को सबसे ज्यादा मार सहन करनी पड़ रही है। मशीनी खेती से पशुधन की उपयोगिता कम हुई है। जिसका असर जमीन की उत्पादकता पर पड़ा है। गायत्री मंदिर में आयोजित इस संवाद में मंथन अध्ययन केंद्र के शोधार्थी रेहमत ने बताया जल जीवन मिशन की योजनाओं के पूर्व न तो स्‍थानीय समुदाय और न ही जन प्रतिनिधियों से संवाद किया। ऐसे गांवों में भी फि‍र से योजना निर्मित कर दी गई। जहां पहले से ही संतोषजनक जलप्रदाय जारी था। इसमें राजेंद्र जोशी, जैविक किसान बाबूलाल काग, दयाराम यादव, हरिओम कुमावत, डॉ. गजेंद्र पाटीदार, जैविक खेती विशेषज्ञ महेश शर्मा, मप्र गांधी स्मारक निधि की सचिव दमयंती पाणी, महाराष्‍ट्र से आए प्रहलाद नेमाड़े ने भी अपनी बात रखी।

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