परमात्मा हमारे भीतर, केवल अंतर्मुखी होने की आवश्यकता: साध्वी गुरुमयी

भास्कर न्यूज | अमृतसर दुर्ग्याणा तीर्थ में आर्ट ऑफ लिविंग द्वारा आयोजित आठ दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान महोत्सव के पांचवें दिन श्रद्धा का सैलाब उमड़ा। साध्वी गुरुमयी जी ने कथा के प्रवाह को आगे बढ़ाते हुए बोध और अनुभव के गूढ़ रहस्यों को साझा किया। उन्होंने भक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि जब सुनी हुई बात अनुभव में उतरती है, तभी वह बोध बनती है। परमात्मा हमारे इतने निकट हैं कि वे दिखाई नहीं देते, ठीक वैसे ही जैसे अत्यधिक समीप रखी वस्तु दृष्टि से ओझल हो जाती है। हमारे और ईश्वर के बीच की दूरी का एकमात्र कारण संसार के प्रति हमारा मोह है। जब तक मन संसार में अटका है, ईश्वर का बोध असंभव है। साध्वी जी ने सूत्रों के माध्यम से बताया कि अंतर्मुखी होकर ही अपने भीतर छिपे परमात्मा को पाया जा सकता है। श्रीमद् भागवत इन सूत्रों को समझने का सर्वोत्तम माध्यम है। कथा श्रवण कर भक्तगणों ने आध्यात्मिक शांति का अनुभव किया।

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