भास्कर न्यूज | जालंधर हिंदू पंचांग के अनुसार, पौष माह की पुत्रदा एकादशी व्रत मंगलवार 30 दिसंबर को है। इस दिन व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने का विधान है। भगवान विष्णु की पूजा में शंख से अभिषेक करना चाहिए। इसके बाद तुलसी पत्र चढ़ाना चाहिए। विद्वानों के अनुसार पौष पुत्रदा एकादशी सोमवार सुबह 10:14 से शुरू होकर मंगलवार को सुबह 7:53 तक रहेगी। उदयकाल 30 दिसंबर को होने की वजह से एकादशी मंगलवार को मान्य होगी। कहा जाता है कि इससे जाने-अनजाने में हुए सभी पाप खत्म हो जाते हैं। व्रत से मिलने वाला पुण्य कभी खत्म नहीं होता। शिव शक्ति मां बगलामुखी धाम के मुख्य पंडित विजय शास्त्री ने बताया कि हिंदू धर्म में एकादशी का बहुत अधिक महत्व है। मान्यताओं के अनुसार, एकादशी व्रत रखने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है और मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है। शास्त्रों में पुत्रदा एकादशी का व्रत विशेष फल देने वाला बताया गया है। नवविवाहित दंपती के लिए इस एकादशी का व्रत वरदान सिद्ध होता है। इस व्रत को विधिवत करने से उत्तम संतान की प्राप्ति का फल बताया गया है। संतान की रक्षा के लिए यह व्रत श्रेष्ठ बताया गया है। उन्होंने बताया कि मान्यता है कि इस दिन व्रत से भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करने पर निसंतान दंपतियों को संतान की प्राप्ति होती है। सिर्फ संतानहीन ही नहीं, बल्कि इस व्रत को करने से संतान वाले साधकों की संतान को हर परेशानी से मुक्ति भी मिलती है और घर में धन-धान्य की किसी प्रकार की कमी नहीं रहती। उन्होंने बताया कि पौष महीने में आने वाली पुत्रदा एकादशी पर पानी में गंगाजल और तिल मिलाकर नहाने की परंपरा है। इस एकादशी पर तिल खाएं और इनका दान भी देना चाहिए। इस पूजा में विष्णु जी के साथ ही भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप की भी पूजा करनी चाहिए, ताकि कृष्ण जैसी सुयोग्य संतान मिल सके। सुबह सूर्योदय के साथ स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा में व्रत का संकल्प लें और पूजा करें। पूजा में भगवान को पीला फल, पीले पुष्प, पंचामृत, तुलसी आदि अर्पित करें। पति-पत्नी एक साथ व्रत का संकल्प लें और पूजा के बाद भगवान की आरती कर सभी में प्रसाद वितरित करें। इसके अलावा जरूरतमंद लोगों को तिल, गुड़ और गर्म कपड़ों का दान करना चाहिए।


