नया रोडवेज:AICTSL को सौंपेंगे दोनों आईएसबीटी यहीं से अप्रैल से चलेंगी नई सरकारी बसें

अप्रैल से शुरू होने वाली नई सरकारी बस सेवाओं के लिए तैयारी तेज हो गई है। इंदौर में एआईसीटीएसएल (अटल इंदौर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विस लिमिटेड) क्षेत्रीय सहायक कंपनी की तरह काम करेगी। यहां 130 लोगों की टीम काम शुरू कर रही है। सबसे अहम बात ये है कि कंपनी को चलाने के लिए उसकी संपत्ति, आय का मॉडल भी तैयार किया गया है, ताकि किसी तरह की परेशानी न आए। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि ऐसी संपत्तियां, जिसमें स्थानीय निकाय या प्राधिकरणों का पैसा नहीं लगा है, वह इस कंपनी के स्वामित्व में रहेगी। कंपनी के उपयोग की ऐसी संपत्तियां, जिनमें नगर निगम, प्राधिकरण ने राशि खर्च की है, उनका मूल्यांकन करके परिवहन विभाग संबंधित एजेंसी को राशि देगा। फिर इनकी आय होल्डिंग कंपनी के अधीन रहेगी। इसके तहत कंपनी डिपो, आधुनिक बस टर्मिनल व सब टर्मिनल का निर्माण भी करेगी। इस नए सिस्टम से इंदौर में दोनों आईएसबीटी (कुमेड़ी व नायता मुंडला) परिवहन विभाग के पास चले जाएंगे। इसके अलावा बस संचालन के लिए बाकी सरकारी बस स्टैंड को भी परिवहन विभाग अपने स्वामित्व में लेगा, लेकिन उसके लिए प्रक्रिया पूरी करना होगी। इंदौर से पहले चरण में इन रूटों पर मिलेगी बसें 32 रूट पर इंदौर से चलेंगी 310 बसें। 11 हजार बसें प्रदेशभर में चलेंगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कुछ दिन पहले सतना में ये सेवा जल्द शुरू करने के संकेत दिए थे, लिहाजा परिवहन विभाग ने तैयारी तेज कर दी है। ये सेवा इंदौर-उज्जैन संभाग से शुरू होगी। यहां करीब 1700 बसें चलाने के लिए रूट तैयार किए हैं। इंदौर से पहले चरण में भोपाल, उज्जैन, खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर, धार, देवास, रतलाम, मंदसौर, नीमच, शाजापुर, नर्मदापुरम, सागर, जबलपुर रूट पर बसें शुरू करने की योजना है। कोशिश ये भी की जा रही है कि महाराष्ट्र और गुजरात के प्राइम रूट पर भी पहले दौर में ही कुछ बसें चलाई जा सकें। इंदौर, उज्जैन के अलावा भोपाल-नर्मदापुरम, जबलपुर, सागर, रीवा-शहडोल, ग्वालियर-चंबल में अलग-अलग कंपनियां बनेंगी, जिन पर बस संचालन की जिम्मेदारी होगी। इन्फार्मेशन व फीडबैक व्यवस्था भी ऑनलाइन
बसों की जानकारी, किराया व बुकिंग सब कुछ ऑनलाइन किया जा सकेगा। इसके लिए एप बनाया जा रहा है। बस यात्री को किसी भी तरह की परेशानी होने पर तत्काल शिकायत कर सकेंगे। यात्रा के अनुभव पर फीडबैक दे सकेंगे। निगरानी के लिए एआई आधारित सिस्टम से होगी। किराए पर मंथन जारी, सरकार का नियंत्रण होगा
इस बस सेवा में सुरक्षा, यात्री सुगमता के साथ कम किराए पर भी सरकार का फोकस है। हर रूट पर बसों के किराए की पूरी लिस्ट तैयार की जा रही है। पीपीपी मॉडल पर सेवा होने के बावजूद सरकार किराए के मामले में कोई गुंजाइश नहीं रखना चाहती, न ही ऑपरेटर को किसी तरह की ऐसी छूट देगी, जिससे उसका नियंत्रण कम हो।

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