जहां लोग रुकने से डरते थे, वहां बसाया टेंट सिटी:गाइड विदेशी टूरिस्ट को टीले दिखाने लाते थे; खेतों में बना दिए तालाब और सनसेट पॉइंट

राजस्थान की एक ऐसी जगह, जहां कभी लोग रात में रुकने से डरते थे। यहां रेत के टीले देखने टूरिस्ट केवल दिन के उजाले में ही आते थे। दावा किया जाता था कि शाम ढलते ही यह जगह पूरी तरह वीरान हो जाती थी। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। जो जगह कभी वीरान रहती थी, वह अब टूरिस्ट से गुलजार है। कैमल सफारी, बाइक राइडिंग, सनसेट पॉइंट… और न जाने क्या-क्या। खाने-रहने से लेकर एडवेंचर एक्टिविटी के सारे इंतजाम हैं। अब यहां दिन-रात चहल-पहल बनी रहती है। शाम ढलते ही पूरा इलाका रंग-बिरंगी रोशनी से जगमगा उठता है। यहां के लोक गीत कानों में रस घोलते हैं। यहां आने वाले टूरिस्ट अपने साथ ऐसी यादें लेकर लौटते हैं, जिन्हें वे कभी भूल नहीं पाते। इस जगह को करीब से जानने-समझने के लिए हम आपको बीकानेर से करीब 15 किमी दूर रायसर ले चलते हैं। पहले ये तस्वीरें देख लीजिए… विदेशी टूरिस्ट को लेकर आते थे गाइड
बीकानेर में आने वाले विदेशी टूरिस्ट की संख्या काफी कम रहती थी। ऐसे में जो भी विदेशी टूरिस्ट यहां आते थे, उन्हें गाइड रेत के टीले दिखाने रायसर ले जाते थे। बताया जाता है कि उस समय यहां चारों तरफ केवल रेत के टीले ही थे। महज 10 से 50 रुपए में ऊंट गाड़ी की सवारी हो जाया करती थी। यहां न तो पीने के लिए पानी की कोई व्यवस्था थी और न ही रात में रुकने के लिए जगह। यहां आने वाले टूरिस्ट दिन में ही यह जगह देखकर वापस लौट जाते थे। 100 बीघा में बसा दिया टेंट सिटी
2018 से पहले यहां टूरिस्ट की संख्या बढ़ने लगी थी। रेत के टीले देखने के लिए कई लोग पहुंचने लगे थे, लेकिन सुविधाएं कुछ भी नहीं थीं। 2018 में कोरोना के दौरान यहां के लोगों ने इस जगह की तस्वीर बदलने की ठानी। साल 2020 में यहां जैसलमेर की तर्ज पर टेंट सिटी बसाने का प्लान तैयार किया गया। जिन लोगों के धोरों में खेत थे, उन्होंने इसकी पहल की। यहां कपड़ों और मिट्टी से टेंट सिटी को डेवलप किया गया। 10 से 15 बीघा में यहां पूरा शहर बसा दिया गया। टेंट सिटी के संचालक राजू सिंह बताते हैं- पहले यहां खेत हुआ करते थे। धीरे-धीरे उनके परिवार ने टूरिस्ट लाना शुरू किया। शुरुआत में टूरिस्ट को सिर्फ ऊंट गाड़ी पर बैठाकर ही सफारी कराई जाती थी। आज यह एरिया टूरिस्ट स्पॉट बन गया है। अब करीब 100 बीघा में यहां टेंट सिटी फैली हुई है। आर्टिफिशियल तालाब तैयार किया
ये पूरा इलाका रेत के ऊंचे-ऊंचे टीलों से घिरा हुआ है। ऐसे में यहां पानी की भी कमी रहती है, क्योंकि रेगिस्तान में पानी ठहर नहीं पाता। टूरिस्टों के लिए यहां एक आर्टिफिशियल तालाब तैयार किया गया है। इसके लिए धोरों पर फर्श बनाकर पानी को रोका गया। इसके बाद तालाब का रूप देने के लिए गोल और अंडाकार आकार की बाउंड्री बनाई गई। इस बाउंड्री और तालाब को चारों तरफ मिट्टी से ढका गया, ताकि यह वास्तविक तालाब जैसा नजर आए। 100 से ज्यादा टेंट सिटी
कोरोना के बाद रेगिस्तान के इस इलाके की पूरी तस्वीर बदल गई। जहां पानी नहीं था, वहां तालाब बना दिया गया। महज पांच साल में नया शहर बसा दिया गया। अब यहां 100 से ज्यादा टेंट सिटी हैं। यह जगह विदेशी टूरिस्टों के साथ-साथ देसी टूरिस्टों के लिए भी पसंदीदा बनती जा रही है। जहां पहले रुकने की कोई सुविधा नहीं थी, वहां अब झोपड़ीनुमा कमरे और छोटी-छोटी ढाणियां बना दी गई हैं। कैमल सफारी से लेकर बाइक रेसिंग और एडवेंचर एक्टिविटी
रिसॉर्ट मालिक शंभू सिंह कहते हैं – टूरिस्ट की सुविधाओं का खासा ध्यान रखा गया है। हर टेंट सिटी में सभी जरूरी सुविधाएं मौजूद हैं। जिस कैंप में टूरिस्ट की बुकिंग होती है, उसी कैंप के परिसर में उन्हें कैमल सफारी से लेकर बाइक रेसिंग समेत अन्य एडवेंचर एक्टिविटी मिल जाती हैं। एडवेंचर के लिए कई कैंपों में प्राकृतिक टीलों के साथ-साथ आर्टिफिशियल टीलों पर रेसिंग ट्रैक बनाए गए हैं। इसके अलावा रायसर के रेतीले धोरों से शाम के समय सूर्यास्त का मनमोहक दृश्य दिखाई देता है। दूर-दूर तक फैले मिट्टी के टीले और डूबते सूरज का नजारा पर्यटकों को आकर्षित करता है। 500 रुपए से शुरू होता है पैकेज, न्यू ईयर पर 100 रूम बुक रायसर का पैकेज 500 रुपए से शुरू होता है, जो अधिकतम 3 हजार रुपए तक जाता है। खास बात यह है कि यहां कुछ टेंट सिटी में मिट्टी से कमरे तैयार किए गए हैं। यहां बिल्कुल गांव जैसी फीलिंग आती है। इनमें लग्जरी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। इधर, न्यू ईयर को लेकर भी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। 15 दिसंबर के बाद यहां सभी रूम बुक हो चुके हैं। इसके बावजूद अब भी यहां बड़ी संख्या में अलग-अलग शहरों से लोग पहुंच रहे हैं। टूरिस्ट बोले- पहली बार ऐसे टीले देखे इन दिनों रायसर में बड़ी संख्या में टूरिस्ट पहुंच रहे हैं। स्थानीय टूरिस्टों के साथ दिल्ली, पंजाब और हरियाणा से भी लोग यहां का सनसेट व्यू और रेत के टीले देखने आ रहे हैं। चंडीगढ़ से आई ऋचा शर्मा कहती हैं- हम चंडीगढ़ से आए हैं। यह जगह बहुत ज्यादा अमेजिंग है। पहली बार इस तरह के टीले और झोपड़ियां देखने को मिलीं। बच्चों के लिए यहां काफी अच्छी सुविधाएं हैं। हम बच्चों को आमतौर पर मिट्टी में खेलने से मना करते हैं, लेकिन यहां बच्चे मिट्टी में खूब खेलते हैं। जकार्ता (इंडोनेशिया) से निखिल अपनी पत्नी राशि के साथ यहां पहुंचे हैं। निखिल बीकानेर में पढ़ाई कर चुके हैं। उनकी पत्नी राशि ने बताया- यहां आकर बहुत अच्छा लग रहा है। मैं पहली बार इस तरह के धोरे देख रही हूं, इसलिए किसी जगह से इसकी तुलना नहीं कर सकती। कैंप संचालक राजू सिंह और चंद्र सिंह ने बताया- पहले यह जगह खाली रहती थी। अब यहां काफी टूरिस्ट आ रहे हैं। कोरोना के बाद यहां सब कुछ बदल गया है। इस बार फुल बुकिंग है। उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास रहता है कि टूरिस्टों को यहां सबसे बेहतर खाना और एडवेंचर एक्टिविटी मिलें। जल्द शुरू होगी पैरा मोटर ग्लाइडिंग रायसर को एडवेंचर टूरिज्म के नक्शे पर और मजबूत करने के लिए जल्द ही पैरा मोटर ग्लाइडिंग की सुविधा शुरू होने जा रही है। एक प्राइवेट कंपनी ने इसके लिए सर्वे पूरा कर लिया है। इसके बाद यहां देसी और विदेशी पर्यटक आसमान में उड़ते नजर आ सकेंगे। एरो स्पोर्ट्स कंपनी के विंग मास्टर सीईओ, कंपनी के संचालक कर्नल वी.एस. राठौड़ का कहना है कि हम बीकानेर में एरो स्पोर्ट्स को प्रमोट करना चाहते हैं। इसके लिए रायसर सबसे बेहतर जगह है। कंपनी इस समय आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में एरो स्पोर्ट्स की एक्टिविटी चला रही है। गोवा और महाराष्ट्र में भी सरकार के साथ ये गतिविधियां जारी हैं। रायसर (बीकानेर) में ड्यून्स के बीच एयर सफारी हो सकती है। सनराइज और सनसेट के समय यह दृश्य काफी रोमांचक होगा।

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