कोटपूतली में अरावली विरासत जन अभियान को लेकर जनसभा:मंगलवार को निकालेंगे पैदल मार्च, जिला कलेक्टर को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपेंगे

कोटपूतली में अरावली विरासत जन अभियान के तहत 30 दिसंबर को एक जनसभा का आयोजन किया जाएगा। यह जनसभा नगर परिषद पार्क में होगी जिसके बाद लोग पैदल मार्च करते हुए जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचेंगे। यहां वे राष्ट्रपति के नाम जिला कलेक्टर प्रियंका गोस्वामी को ज्ञापन सौंपेंगे। ज्ञापन में सुप्रीम कोर्ट के अरावली से संबंधित एक फैसले को रद्द करने की मांग की जाएगी। ‘पशुधन का सहारा, भू-जल रिचार्ज का मुख्य स्रोत’ सामाजिक कार्यकर्ता राधेश्याम शुक्लावास ने बताया- अरावली पर्वतमाला भारत की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखला है और इसे उत्तरी भारत की जीवन रेखा माना जाता है। राजस्थान में अरावली की छोटी पहाड़ियां जीवन का आधार हैं, जो पशुधन को सहारा देती हैं और भू-जल रिचार्ज का मुख्य स्रोत हैं। ‘बारिश के पानी के लिए बहुत महत्वपूर्ण’ ये चट्टानी संरचनाएं बारिश के पानी को भूमिगत भेजकर राजस्थान की जल सुरक्षा सुनिश्चित करती हैं। चंबल, साबरमती, लूनी, बनास, साहिबी और सोता जैसी नदियां इन्हीं पर्वतमालाओं से पोषित होती हैं। शुक्लावास के अनुसार, अरावली के बिना उत्तर भारत में जल संकट गहरा सकता है, जिससे पीने के पानी और कृषि पर बुरा असर पड़ेगा। अरावली जैविक विविधता का भी एक महत्वपूर्ण खजाना है। ‘कॉर्पोरेट मित्रों और खनन माफिया को होगा फायदा’ शुक्लावास ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में आदेश दिया है कि केवल 100 मीटर से ऊंची भू-आकृतियों को ही अरावली पहाड़ी माना जाएगा। इस फैसले के कारण अरावली का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा संरक्षण से बाहर हो गया है। उन्होंने इस फैसले को एक सुनियोजित साजिश बताया है, जहां कॉर्पोरेट मित्रों व खनन माफिया को अरावली लूट का लाईसेंस दिया जायेगा। आंदोलन की चेतावनी दी हमारी मांग है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले को निरस्त कराये। सुप्रीम कोर्ट उक्त आदेश को वापस नहीं लेगा तब तक अरावली विरासत जन अभियान के संगठनों द्वारा जन आंदोलन जारी रहेगा। रविवार को सामाजिक कार्यकर्ता राधेश्याम शुक्लावास के नेतृत्व में मास्टर जयसिंह यादव, सुबे सिंह मीणा, ग्यारसीलाल आर्य, पूर्व उप सरपंच सम्पत राम यादव व गोकुल यादव आदि ने विभिन्न गांवों में जन सम्पर्क कर लोगों को अरावली विरासत जन अभियान के समर्थन में पहुंचने के लिये पम्पलेट वितरित किये।

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