राजस्थान की आगामी आबकारी नीति 2025-29 को लेकर प्रदेश भर के शराब कारोबारियों में सुगबुगाहट तेज हो गई है। इसी क्रम में ‘लिकर कॉन्ट्रैक्टर्स (W) एसोसिएशन, झुंझुनू’ ने जिला आबकारी अधिकारी को शासन सचिव, आबकारी आयुक्त के नाम ज्ञापन सौंपकर वर्तमान नीति में सुधार और ठेकेदारों को आ रही समस्याओं के समाधान की मांग की है। एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार राजस्व में वृद्धि चाहती है, तो उसे व्यावहारिक धरातल पर सुधार करने होंगे। रात 11 बजे तक खुलें शराब की दुकानें एसोसिएशन ने प्रमुखता से मांग उठाई है कि आगामी नीति में मदिरा दुकानों के संचालन का समय सुबह 10 बजे से बढ़ाकर रात 11 बजे तक किया जाए। ज्ञापन में तर्क दिया गया है कि राजस्थान के सीमावर्ती राज्यों (जैसे हरियाणा और पंजाब) में दुकानें देर रात तक खुलती हैं। राजस्थान में जल्दी दुकानें बंद होने के कारण अवैध शराब की बिक्री और तस्करी बढ़ जाती है। समय बढ़ाने से न केवल अवैध संचालन रुकेगा, बल्कि सरकारी राजस्व में भी इजाफा होगा। सर्वर डाउन होने का खामियाजा भुगत रहे ठेकेदार, पेनल्टी माफी की मांग ठेकेदारों का कहना है कि विभाग की SSO ID और सर्वर डाउन रहने के कारण वे समय पर प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाए, जिसके चलते उन पर भारी पेनल्टी लगा दी गई है। एसोसिएशन ने मांग की है कि विभाग अपनी तकनीकी खराबी की जिम्मेदारी ले और ठेकेदारों पर लगी पेनल्टी माफ करे। सितंबर में राशि जमा कराने वाले अनुज्ञाधारियों को बिना किसी अतिरिक्त दंड के मदिरा उठाव का अवसर दिया जाए। वार्षिक वृद्धि दर 10% से घटाकर 5% करने का सुझाव आगामी नीति के बिंदु संख्या 2.8.3 के तहत प्रस्तावित 10% वार्षिक वृद्धि (बढ़त) का कारोबारियों ने कड़ा विरोध किया है। एसोसिएशन का कहना है कि किसी भी सेक्टर में हर साल 10% की बढ़त व्यावहारिक नहीं है। इससे 4 साल तक दुकानों का नवीनीकरण (Renewal) करवाना असंभव हो जाएगा। ठेकेदारों ने सुझाव दिया है कि इसे 5% किया जाए, ताकि राजस्व भी समय पर मिले और कलस्टर का नवीनीकरण भी सुगमता से हो सके। अन्य प्रमुख मांगें एसोसिएशन ने शराब कारोबार को सरल बनाने के लिए प्रमुख बिंदु भी रखे। प्रमुख रूप से वार्षिक मदिरा उठाव की गारंटी को त्रैमासिक (Quarterly) आधार पर तय किया जाए। ए.एल.एफ. (Annual License Fee) के माल को भी गारंटी कोटे में शामिल किया जाए। मध्य संयम नीति के तहत लगाई जाने वाली पेनल्टी किसी भी स्थिति में ठेकेदार के प्रॉफिट मार्जिन से अधिक नहीं होनी चाहिए।


