प्रतापपुर विधायक के जाति प्रमाण पत्र की सुनवाई फिर टली:अधिकारी-कर्मचारियों का हड़ताल बना कारण, अब 29 जनवरी को होगी सुनवाई

प्रतापपुर से भाजपा विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते के कथित फर्जी जाति प्रमाण पत्र प्रकरण में आज होने वाली सुनवाई एक बार फिर टल गई। अधिकारियों-कर्मचारियों की हड़ताल के कारण जिला स्तरीय सत्यापन समिति के सदस्य उपस्थित नहीं हो सके। अब समिति अध्यक्ष ने अगली सुनवाई की तारीख 29 जनवरी 2026 तय की है। प्रतापपुर विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते के कथित फर्जी जाति प्रमाण पत्र मामले में आज सोमवार को जिला स्तरीय सत्यापन समिति के समक्ष सुनवाई प्रस्तावित थी। आज से ही अधिकारी-कर्मचारी फेडरेशन के हड़ताल के कारण समिति के सदस्य मौजूद नहीं हो सके। इस वजह से सुनवाई टाल दी गई। आज होना था आपत्ति पर तर्क
विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता बृजेंद्र पाठक ने बताया कि प्रारंभिक आपत्ति पहले ही प्रस्तुत की जा चुकी है, जिस पर आज तर्क होना था। लेकिन कर्मचारियों के हड़ताल पर चले जाने के कारण समिति के सदस्य उपस्थित नहीं थे, इसलिए सुनवाई संभव नहीं हो सकी। सुनवाई के एक सप्ताह में होगा निर्णय
सर्व आदिवासी समाज की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता जे.पी. श्रीवास्तव ने कहा कि सत्यापन समिति के अध्यक्ष, जो कि अपर कलेक्टर हैं, द्वारा आज सुनवाई की जानी थी, लेकिन कर्मचारियों के अभाव में तारीख बढ़ा दी गई। जेपी श्रीवास्तव ने बताया कि हाईकोर्ट द्वारा इस मामले में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि जाति प्रमाणपत्र विवाद से जुड़े प्रकरण में शीघ्र निर्णय लिया जाए। आदेश में 30 दिन के भीतर निर्णय देने का उल्लेख है। पीठासीन अधिकारी ने यह भी कहा है कि दोनों पक्ष अपने-अपने तर्क लिखित रूप में प्रस्तुत करें, जिसके बाद एक सप्ताह के भीतर निर्णय दिया जाएगा। जेपी श्रीवास्तव ने अपने तर्क दोहराते हुए कहा कि विधायक का जाति प्रमाणपत्र पूरी तरह फर्जी है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर किन दस्तावेजों के आधार पर यह प्रमाणपत्र बनाया गया, जबकि संबंधित कागजात प्रस्तुत करने से बचा जा रहा है। उन्होंने कहा कि जाति प्रमाणपत्र हमेशा पिता के नाम से बनता है, पति के नाम से नहीं। जबकि विधायक का प्रमाणपत्र पति के आधार पर बनाया गया है, जो कानूनन अवैध है। संतोषजनक निर्णय नहीं तो होगा आंदोलन
इस मामले में आंदोलन की अगुआई कर रहे अनुसूचित जनजाति आयोग के पूर्व अध्यक्ष भानु प्रताप सिंह ने कहा कि आज की तारीख केवल कर्मचारियों की अनुपस्थिति के कारण बढ़ी है। अब 29 जनवरी अगली तारीख तय की गई है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि उस दिन समाज को संतोषजनक निर्णय नहीं मिला, तो इसके बाद उग्र आंदोलन किया जाएगा। दो बार टाली गई है सुनवाई
विधायक के जाति प्रमाणपत्र मामले में जिला स्तरीय छानबीन समिति ने 11 दिसंबर को भी निर्णय सुरक्षित रखते हुए सुनवाई टाल दी गई थी, जिसके बाद आदिवासी समाज ने चक्का जाम और विरोध प्रदर्शन किया था। सभी की निगाहें 29 जनवरी 2026 को होने वाली सुनवाई और संभावित निर्णय पर टिकी हैं।

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