पं. धीरेंद्र शास्त्री बोले – हमारा दरबार लगाना अंधविश्वास:और चादर चढ़ाना, कैंडल जलाना विश्वास, कहा- देशद्रोही चीलगाड़ी पर उड़ सकता है, लेकिन सनातन जगाने वाला हवाई जहाज पर नहीं बैठ सकता

भिलाई के जयंती स्टेडियम में आयोजित हनुमंत कथा के अंतिम दिन पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री महाराज ने धर्म, आस्था, अंधविश्वास, धर्मांतरण और अपने ऊपर हो रही आलोचनाओं पर खुलकर बात रखी। कथा के दौरान उन्होंने कहा कि हमारा दरबार लगाना लोगों को अंधविश्वास लगता है, लेकिन चादर चढ़ाना विश्वास है, कैंडल जलाना विश्वास है। उन्होंने सवाल उठाया कि आस्था के पैमाने अलग-अलग क्यों बनाए जाते हैं। पं. धीरेंद्र शास्त्री ने अपने छत्तीसगढ़ आगमन पर उठे सवालों का भी जवाब दिया। उन्होंने मंत्री की तरफ इशारा करते हुए कहा कि ये हमें वापस लेकर जाएंगे या नहीं, लेकिन लेकर यही आए हैं। बहुत लोग हमारे आने पर सवाल उठा रहे हैं, लेकिन सच ये है कि असली गुनाहगार लाने वाला है, हम तो आने वाले हैं। उन्होंने यात्रा को लेकर तंज कसते हुए कहा कि लोग कहते हैं बाबा हवाई जहाज से आया, उस गाड़ी से आया। अरे बाबा भी आदमी है, देश का ही है, कोई विदेशी थोड़े ही है। देश को लूटने वाले घूम सकते हैं, देशद्रोही चील गाड़ी पर उड़ सकते हैं, लेकिन सनातन जगाने वाला, कैंसर अस्पताल बनाने वाला, बेटियों का विवाह करवाने वाला और नशा छुड़वाने वाला आदमी हवाई जहाज पर चढ़ने का अधिकारी नहीं है। यह कैसी बुद्धि है, ठठरी के बरे। गाड़ी सामने आया भक्त, मिलने के लिए महिला ने काटी नश
कथा के दौरान एक घटना का जिक्र करते हुए बागेश्वर बाबा ने बताया कि एक भक्त उनकी गाड़ी के सामने आ गया था। उसकी शादी नहीं हो रही थी, इसलिए वह आशीर्वाद मांगने पहुंचा। इस दौरान कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। बाबा ने कहा कि शुक्र मनाओ कि सिर्फ शीशा टूटा, अगर उसकी शादी नहीं हुई तो उसका दिल टूट जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि परसों सूचना मिली कि किसी लड़की ने उनसे मिलने के लिए नस काट ली। इस पर उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि बहनजी से प्रार्थना करेंगे कि नस मत काटो, नहीं तो हमें जेल चले जाना पड़ेगा। बाबा कुछ कहे तो कहते हैं पाखंड कर रहा, अंधविश्वास फैला रहा
धर्मांतरण के मुद्दे पर बोलते हुए पं. धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि भोले-भाले हिंदुओं को लालच देकर, ढोंग रचाकर बेचारे हिंदुओं का धर्मांतरण कर रहे हैं। अरे वो तो भला हो हिंदुओं का, भला हो कांकेर वालों का, उन्होंने ऐसी बिगुल बजाई कि यदि तु्म्हे दूसरे अच्छे लगते हैं न, दूसरे मजहब वाले, तो तुम यहां गढ़ोगे नहीं, उनके ही देश में जाकर बसो। यहां न गढ़ोगे, दूसरे देश हैं। कांकेर में कई लोगों पर लाठियां चली। पता नहीं क्यों लोग हिंदू से इतना जलते हैं। हम कोई भी बात कह दें तो कह देते हैं बाबा तो पाखंड कर रहा, बाबा अंधिविश्वास फैला रहा। हमारा दरबार लगाना अंधविश्वास है। चादर चढ़ाना विश्वास है। कैंडल जलाना विश्वास है।

पुलिस की वर्दी के अंदर भी इंसान है, उसकी भी आस्था है
कथा के दौरान पुलिसकर्मी द्वारा टोपी उतारकर प्रणाम करने के मामले पर भी बाबा ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वर्दी के अंदर भी इंसान होता है, उसकी भी आस्था होती है। कोई अपने माता-पिता या गुरु को प्रणाम करे तो इसमें गलत क्या है। उन्होंने आलोचना करने वालों पर तंज कसते हुए कहा कि तुम यह कहो कि यह नहीं होना चाहिए, ठठरी के बरे तो काका को प्रणाम करें।

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