भास्कर न्यूज | दंतेवाड़ा जिले में अभी तक जितने भी प्लांटेशन किए जाते थे पौधों की सप्लाई दूसरे प्रदेशों से होती थी। सबसे ज्यादा राजमेन्द्री से पौधे की सप्लाई होती है, राजमेन्द्री में तैयार किए गए पौधे खाड़ी देशों में भी भेजे जाते हैं, वहीं से अभी तक बस्तर में किए जा रहे प्लांटेशन के लिए भी पौधे लाए जाते हैं, पर अब स्थानीय स्तर पर वन विभाग द्वारा यहीं के लोकल बीज से पौधे तैयार किए जा रहे हैं। विभाग के अधिकारी ने बताया यहां के बीज आसानी से तैयार हो जाते हैं, बाहर की नर्सरी से लाए गए पौधे क्लाइमेट बदलने से आधे मर जाते हैं आधे ही तैयार हो पाते हैं, लोकल स्तर पर जंगलों से बीज भी विभाग के द्वारा संग्रहण कर फिर इसे नर्सरी में पौधा तैयार कर लगवाए जा रहें हैं। विलुप्त हो रहे कुल्लू जिसे स्थानीय लोग पौधे भी कर रहे तैयार नेरली घाटी में 40 प्रजाति के पौधे नर्सरी में तैयार किए जा रहे हैं, जिसमें पहली बार कोकोनट बोर्ड कोंडागांव को छोड़कर कहीं भी नारियल की नर्सरी नहीं है ,पर नेरली में नारियल के पौधे भी बीज से तैयार किए जा रहे हैं, 5 हजार नारियल के पौधे अभी तैयार किए गए हैं साथ ही बैलाडीला और बस्तर के जंगल से विलुप्त हो रहे कुल्लू के ब्रीड भी तैयार की जा रही है। कुल्लू बस्तर से विलुप्त होने की कगार पर है, जिले के मोलसनार क्षेत्र में कुछ पेड़ बचे हैं, कुल्लू से गोंद निकलता है जो बाजार में बहुत ही महंगे दर पर मिलता है। मुफ्त में दे रहे प्लांटेशन के लिए पौधे नर्सरी में तैयार हो रहे पौधे अभी बारिश के सीजन में स्कूलों, आश्रम सहित सुरक्षा बलों के कैंप और दूसरे प्लांटेशन करने वालों को मुफ्त में दिए गए थे, वन विभाग द्वारा पौधे लगाने के लिए लोगों को प्रेरित किया जा रहा है। ओरिजनल गार्डन का आनंद ले सकेंगे लोग नेरली की नर्सरी आम लोगों के लिए भी खोल दी गई है, अभी तक लोग आर्टिफिशियल गार्डन में ही शाम सुबह जाते हैं, पर नेरली में ओरिजनल गार्डन तैयार हो गया है,यहां वाचा टावर भी लकड़ी और बांस से तैयार किय गया है। जिले में 3 नर्सरी है, पाताररास, मुचनार और नेरली जबकि नेरली में दूसरे प्रदेश की तर्ज पर ही बस्तर के जंगलों से बीज एकत्र कर पौधे तैयार कर रहे हैं, दो स्टेप में पौधे तैयार कर रहे हैं पहले एकदम छोटे पौधे नर्सरी से प्लांटेशन के लिए भेज दिए जाते थे, जिसे मवेशी चर जाते थे, अब पौधे बड़े होने के बाद ही नर्सरी से निकाल रहे हैं।


