पिता की मौत के 6दिन बाद जगराते में पहुंचे:मास्टर सलीम भावुक हुए बोले महामाई स्वर्गीय पुरन शाहकोटी को अपने चरनों में निवास दे

जालंधर मशहूर भजन गायक मास्टर सलीम अपने पिता के निधन के महज छह दिन बाद फगवाड़ा के धर्मकोट मोहल्ला में आयोजित महामाई के जगराते में पहुंचे। मंच पर पहुंचते ही वे भावुक हो गए और माता रानी के चरणों में अरदास करते हुए बोले कि आज वे जितना भी गा सकेंगे, माता उसे स्वीकार करें। उन्होंने भावुक होते हुए कहा आज वो जैसा भी गा सके आप संगत उसको सवीकार करना। मेरे पिता जी ने मुझे जागरण में भजन गाना सिखाया। महामाई की कृप्पा से जहा तक पहुंचा हूं। अपने पिता के महामाई के आगे अरदास करूंगा उनको अपने चरणों में निवास दे। मास्टर सलीम ने बताया कि आज उनके पिता कर अंतिम अरदास गुरुद्वारा सिंह सभा माडल टाउन में दोपहर 1 बजे से 2 बजे तक होगी कलाकार की जिंदगी आसान नहीं, दुख में भी निभानी पड़ती है जिम्मेदारी मास्टर सलीम ने कहा कि कलाकार की जिंदगी आसान नहीं होती। घर में चाहे कितनी भी बड़ी त्रासदी क्यों न हो, कलाकार को लोगों के सामने अपनी जिम्मेदारी निभानी ही पड़ती है। उन्होंने राज कपूर की फिल्म मेरा नाम जोकर का जिक्र करते हुए कहा कि जैसे उस फिल्म में मां के निधन के बावजूद कलाकार को शो करना पड़ता है, वैसे ही कलाकार की जिंदगी भी होती है। उन्होंने कहा मंगलवार को पिता की अंतिम अरदास है। लेकिन मैं महामाई की लगाई डयूटी निभाने आया हूं। जगराता सबसे पवित्र आयोजन, इसे मना नहीं कर सका उन्होंने कहा कि जगराता कोई सामान्य कार्यक्रम नहीं बल्कि बेहद पवित्र और श्रद्धा से जुड़ा आयोजन होता है। इसी कारण वह इसे मना नहीं कर सके। उन्होंने भावुक होकर कहा कि वह अपने पिता की आत्मा की हाजिरी भी माता रानी के चरणों में अर्पित करना चाहते हैं, ताकि माता उन्हें अपने चरणों में स्थान दें। पूरन शाहकोटी का किया स्मरण, भावुक होकर गाए भजन मास्टर सलीम ने स्वर्गीय पूरन शाहकोटी को याद करते हुए कहा कि माता रानी की भेंटें और भजन गाने की प्रेरणा उन्हें उन्हीं से मिली। जब भी माता रानी की कोई एल्बम रिकॉर्ड होती थी, वे उन्हें गणेश वंदना और विशेष भेंटें गाने के लिए प्रेरित करते थे। जगराते में मास्टर सलीम ने पूरी श्रद्धा और भावुकता के साथ माता रानी की भेंटें प्रस्तुत कीं, जिससे माहौल भक्तिमय हो गया। मास्टर सलीम पिता के जाने के बाद बोले सुरों-म्यूजिक की पूरी सदी शांत हो गई पिता के निधन पर मास्टर सलीम ने कहा- एक सुरों-म्यूजिक की पूरी सदी शांत हो गई। बच्चे का वैसे ही बाप हो तो वह बाप को बहुत प्यार करते हैं। वह एक बाप होने के साथ बड़े कलाकार, फिलॉस्फर और गुरु थे। उनका घाटा कभी पूरा नहीं हो सकता। सिंगर हंसराज हंस ने मीडिया से बातचीत में बताया कि पूरण शाहकोटी को उनके जालंधर स्थित घर देओल नगर में ही सुपुर्द ए खाक किया जाएगा। उनकी अंतिम इच्छा यही थी कि उन्हें श्मशान घाट न ले जाया जाए। हंसराज हंस बोले थे- मेरे माईं-बाप थे, मैं उनका दास सिंगर हंसराज हंस ने कहा- आज वह हस्ती भी इस जहान से कूच कर गई, जो सारे जहान के उस्ताद थे। हमारा अस्तित्व उनसे था। मैं उनका दास था। बचपन में मैं इनके पास आया था। एक बायलॉजिकल मां-बाप हैं दूसरे ये हमारे माई-बाप थे, जिन्होंने गूंगों को बोलना सिखाया। आज जो कुछ भी अचीव हुआ, उस शहंशाह, उस्ताद शाहकोटी साहब के नाम से हुआ। हमें पता नहीं था कि कभी हमें ये लफ्ज भी बोलने पड़ेंगे कि वह नहीं रहे।

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