गार्बेज शुल्क:पांच कैटेगरी में दुकान पेट्रोल पंप और शोरूम के अलग रेट

लंबे समय से गार्बेज शुल्क को लेकर चल रहा विवाद को खत्म करने के लिए नगर निगम ​परिषद में बड़ा फैसला हुआ। सोमवार को निगम परिषद में सत्ता-विपक्ष के पार्षदों की सहमति के बाद गार्बेज शुल्क को लेकर सभापति मनोज सिंह तोमर ने बड़ा फैसला सुना दिया। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष हरीपाल के प्रस्ताव को मंजूर करते हुए 1000 वर्गफीट से ऊपर की दुकान (गोदाम) पर 10 हजार रुपए शुल्क नहीं देने की बात कही। अब इसके लिए 5 कैटेगरी बना दी हैं। उस हिसाब से 1000 से 2000 वर्गफीट की दुकान पर सिर्फ एक हजार रुपए गार्बेज शुल्क प्रतिवर्ष के हिसाब से देना होगा। अब निगम में गार्बेज शुल्क की श्रेणी में गोदाम नहीं वेयरहाउस का उपयोग होगा। आवासीय कैटेगरी में गार्बेज शुल्क या फिर सफाई कर में से कोई एक शुल्क जनता से वसूलने के निर्देश सभापति ने आयुक्त संघ प्रिय को दिए। जल विहार में 3 घंटे के इस सम्मेलन में 2.45 घंटे तक पार्षदों में बहस होती रही। शेष समय में 2 बिंदु पास हुए। गार्बेज शुल्क को लेकर चेंबर ऑफ कामर्स के अध्यक्ष डॉ.प्रवीण अग्रवाल ने अपना प्रस्ताव दिया था। वे परिषद में मौजूद रहे। वहीं ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर की तरफ से विधायक प्रतिनिधि के रूप में कृष्णराव दीक्षित को भेजा गया। निगमायुक्त के जबाव से पार्षद नाखुश, हंगामा हुआ
पार्षद जितेंद्र मुदगल ने सवाल किया कि चेतकपुरी सड़क घटना के बाद आयुक्त ने शासन से प्रतिनियुक्ति पर सहायक इंजीनियर मांगे थे। तब सहायक यंत्री रजनीश देवेश और अभिषेक भदौरिया को शासन ने भेजा था। आदेश में लिखा था कि यदि निगम में इंजीनियर आए, तो प्रतिनियुक्ति पर भेजे सहायक इंजीनियर को वापस कर दिया जाए। लेकिन निगम ने ऐसा नहीं किया। इस सवाल पर आयुक्त संघ प्रिय के जवाब से सत्ता-विपक्ष के पार्षद नाखुश नजर आए। इस पर सभापति ने निर्देश दिए कि दोनों को मूल विभाग भेजा जाए। परिषद में पार्षदों की बेंच पर माइक बंद थे। इस पर सभापति नाराज हुए। उन्होंने आयुक्त से जवाब मांगा। आयुक्त ने कहा कि मैं इसे चेक कराता हूं।

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