बच्चों को 8-10 हजार में बेचने वाले तीन दलाल पकड़े:मासूमों का सौदा करने वालों को दैनिक भास्कर ने किया था एक्सपोज

दैनिक भास्कर ऐप की खबर ‘राजस्थान में 8-10 हजार में मां-बाप बेच रहे बच्चे’ का बड़ा असर हुआ है। राजस्थान के नाबालिग बच्चे-बच्चियों को मजदूरी के लिए गुजरात में लीज पर बेचने वाले 3 दलालों को आखिरकार पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। ये दलाल 500 और एक हजार रुपए के कमीशन के लिए 8 से 12 साल के बच्चों का सौदा करवा रहे थे। दैनिक भास्कर टीम ने इस खुलासे के लिए करीब 50 दिन राजस्थान के गुजरात बॉर्डर से सटे चार जिलों उदयपुर, डूंगरपुर, सिरोही और बांसवाड़ा में पड़ताल की थी। इन इलाकों में सक्रिय चार दलालों को कैमरे पर बेनकाब किया था। खबर प्रकाशित होने के बाद उदयपुर रेंज आईजी और एसपी के निर्देशन में टीम बनाई गई। पुलिस ने मानव तस्करी के आरोप में दलालों की तलाश शुरू कर दी। मंगलवार को 2 एजेंट मोतीलाल और बंशीलाल को गिरफ्तार कर लिया था। बुधवार को दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने दोनों आरोपियों को जेल भिजवा दिया। इधर, सिरोही जिले के पिंडवाड़ा पुलिस ने भी तीसरे दलाल को गिरफ्तार कर लिया है। मानव तस्करी की गंभीर धाराएं, कोर्ट ने जेल भेजा दैनिक भास्कर ने 11 जनवरी को ‘राजस्थान में 8-10 हजार में मां-बाप बेच रहे बच्चे’ और 12 जनवरी को ‘शराबी पिता ने 1500 रुपए महीना लीज पर दी बेटी’ शीर्षक से दो खबरें पब्लिश की थी। इन खबरों के जरिए खुलासा किया था कि एजेंट मोतीलाल और बंशीलाल कमीशन लेकर बच्चों को मजदूरी के लिए गुजरात भिजवाने का काम करते हैं। खुलासे के बाद पुलिस ने एक्शन लेते हुए पड़ताल शुरू की तो पता लगा कि मोतीलाल (40) पुत्र कन्हैयालाल उदयपुर के फलासिया थाना क्षेत्र के धमाणा गांव में रहता है। दूसरा एजेंट बंशीलाल (32) पुत्र कन्हैयालाल उसी का भाई है और वो सुखेर में एक फैक्ट्री में काम करता है। फलासिया थाना पुलिस ने जांच के बाद 12 जनवरी को बंशीलाल और मोतीलाल के खिलाफ मानव तस्करी की धाराओं में मामला दर्ज किया। झाड़ोल सीओ नेत्रपाल सिंह और फलासिया थानाधिकारी सीताराम ने बताया कि मंगलवार को एजेंट मोतीलाल और बंशीलाल को गिरफ्तार कर लिया था। गिरफ्तार करने के बाद बुधवार को कोर्ट में पेश किया। यहां कोर्ट ने दोनों आरोपियों को जेल भिजवा दिया गया। 3 एजेंट गिरफ्तार, नाबालिग को किया पाबंद उदयपुर पुलिस ने 2 एजेंट को गिरफ्तार किया है। वहीं सिरोही जिले के पिंडवाड़ा डीएसपी भंवर और स्वरूपगंज थानाधिकारी कमल सिंह ने तीसरे दलाल लादूराम उर्फ आकाश पुत्र वालाराम भील निवासी केर को गिरफ्तार कर लिया। चौथे नाबालिग दलाल को संरक्षण में लेकर पाबंद किया है। पुलिस जांच करेगी कितने बच्चे गुजरात गए पुलिस दोनों एजेंट से पूछताछ के आधार पर जांच कर पता लगाने का प्रयास कर रही है कि उन्होंने अब तक कितने बच्चों का सौदा करके मजदूरी के लिए गुजरात भिजवाया है। एजेंट मोतीलाल से इन्वेस्टिगेशन कर रही टीम ने फैक्ट्री मालिक बनकर 10-15 बच्चों और 5-6 नाबालिग बच्चियों की डिमांड की थी। तब एजेंट ने कैमरे पर खुलासा किया था कि उसने एक बार 500 से ज्यादा लोगों को गुजरात भिजवाया था। इनमें कई बच्चे थे और कई युवा भी थे। बच्चे दिखाते समय एजेंट ने यह भी बताया था कि ये बच्चे पहले भी गुजरात जाकर आ चुके हैं। उस दौरान उसने ही इन बच्चों को मजदूरी के लिए गुजरात भिजवाया था। पुलिस अब दोनों एजेंट से पूछताछ कर पता लगाने का प्रयास कर रही है कि दोनों ने अब तक कितने बच्चों को सौदा करके गुजरात मजदूरी के लिए भिजवाया है। इनमें से कोई बच्चा कहीं अभी गुजरात में तो फंसा हुआ नहीं है। जांच में अगर ऐसे बच्चों का पता लगा जो गुजरात में फंसे हैं तो पुलिस उनके रेस्क्यू का भी प्रयास करेगी। इधर, पुलिस सिरोही जिले के पिंडवाड़ा और स्वरूपगंज में एक्टिव अन्य दलालों को भी पकड़ने का प्रयास कर रही है। हर महीने 4 जिलों से कई बच्चों को बाहर भेज देते हैं दलाल बच्चों को रेस्क्यू करने वाले टीचर दुर्गाराम ने बताया- उदयपुर, सिरोही, डूंगरपुर और बांसवाड़ा जिलों की सीमा गुजरात से लगती है। चारों जिलों के ट्राइबल एरिया में दलाल सबसे ज्यादा सक्रिय हैं। लगभग हर गांव में दलाल बैठे हैं, जो हर महीने कई बच्चों का सौदा करके उन्हें मजदूरी के लिए बिकवा देते हैं। इसके बदले ये हर महीने कमीशन लेते हैं। सबसे ज्यादा बच्चे गुजरात जाते हैं। इन बच्चों को भेड़-बकरियों की तरह जीपों में भरकर रात को गुजरात ले जाया जाता है। सौदेबाजी सबसे ज्यादा अगस्त से नवंबर और फरवरी से मार्च महीने में होती है। इन महीनों में गुजरात में फैक्ट्रियों के अलावा फसलों की बुवाई-कटाई के लिए भी बच्चों की सप्लाई होती है। बच्चों ने बताया था 12-12 घंटे करवाया जाता था काम, कई बच्चियां दरिंदगी का शिकार दलालों को बेनकाब करने के बाद भास्कर टीम ने उनके चंगुल से रेस्क्यू हुए बच्चों से बात की थी। बच्चों ने बताया था कि एजेंट उन्हें फाइव स्टार होटल में काम करने, हर महीने अच्छी सैलरी और लजीज खाना खिलाने का झांसा देते हैं। एजेंटों ने जिन बच्चों को गुजरात में लीज पर बेचा, उनमें से कई बच्चियों को दरिंदगी का सामना करना पड़ा था। इन बच्चों के रेस्क्यू करने वाले टीचर दुर्गाराम ने काउंसलिंग की तो कई डरावनी बातें सामने आईं….. कार्रवाई में बच्चों के मां-बाप ही सबसे बड़ी चुनौती पुलिस के लिए ऐसे मामलों की जांच में बच्चों के मां-बाप भी सबसे बड़ी चुनौती होते हैं। गरीबी के कारण मां-बाप भी एजेंट के जरिए बच्चों को मजदूरी के लिए गुजरात भिजवा देते हैं। जब बच्चे वहां से भागकर आ जाते हैं तो खुद मां-बाप पुलिस में शिकायत करने से मना कर देते हैं। कोई इन एजेंट के खिलाफ मामला दर्ज करवा भी दे तो इन बच्चों के मां-बाप बयान देने से मुकर जाते हैं। मां-बाप बच्चों पर भी कुछ नहीं बोलने के लिए दबाव बनाते हैं। ऐसे में इन एजेंट के खिलाफ कभी कठोर कार्रवाई नहीं हो पाती। एजेंट बेखौफ होकर फिर से इन बच्चों को मजदूरी के लिए गुजरात भिजवा देते हैं। पढ़िए सीरीज की दोनों खबरें… 1. राजस्थान में 8-10 हजार में मां-बाप बेच रहे बच्चे:मासूमों का सौदा करने वाले दलाल भास्कर के कैमरे पर एक्सपोज, पार्ट-1 ‘मुझे 500 भेड़-बकरियों के बाड़े में रातभर बंधक बनाकर रखते थे… दिन में 25-30 किलोमीटर पैदल चलाते थे…भागने की कोशिश करता तो गर्म सरिए से शरीर दाग देते…पैर इतने टेढ़े हो गए कि चल भी नहीं पाता था…(CLICK कर पूरा पढ़ें) 2. शराबी पिता ने 1500 रुपए महीना लीज पर दी बेटी:फार्म हाउस में मजदूरी के बजाय दरिंदगी; कई हुए टॉर्चर के शिकार, पार्ट-2 12 साल की गुनगुन (बदला हुआ नाम) को गरीबी के कारण स्कूल छोड़ना पड़ा। गांव का एक दलाल मजदूरी करवाने उसे गुजरात ले गया। इसके बदले वो उसके घरवालों को हर महीने 1500 रुपए भेजता रहा। करीब 1 साल बाद घर लौटी गुनगुन ने जो हकीकत बयां की उसे सुनकर हर किसी की रूह कांप गई…(CLICK कर पूरा पढ़ें)

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