लाइलाज या बहुत गंभीर बीमारी के चलते मौत से पहले होने वाला असहनीय दर्द, घबराहट और मानसिक पीड़ा को कम करने के लिए चलाई जा रही उपशामक परिचर्या सेवाओं में मध्यप्रदेश देश के टॉप-10 राज्यों में शामिल हुआ है। राष्ट्रीय उपशामक परिचर्या कार्यक्रम के तहत बीते ढाई साल में प्रदेश के 8.4 लाख से ज्यादा रोगियों को राहत दी गई। इनमें बड़ी संख्या ऐसे मरीजों की है, जिनकी बीमारी अंतिम चरण में थी और जिन्हें इलाज से ज्यादा आराम और सहारे की जरूरत थी। आंकड़े बताते हैं कि 2.33 लाख से ज्यादा रोगियों को अस्पताल बुलाने के बजाय स्वास्थ्यकर्मियों ने उनके घर जाकर सेवा दी। वित्तीय वर्ष 2023-24 में 86560, 2024-25 में 89897 और 2025-26 में अक्टूबर तक 56862 मरीजों को स्वास्थ्यकर्मियों ने घर जाकर ही सेवाएं दी हैं। इससे न सिर्फ मरीजों का दर्द और मानसिक तनाव कम हुआ, बल्कि परिवारों को भी राहत मिली। राष्ट्रीय स्तर पर तुलना में यह कवरेज मप्र को अग्रणी राज्यों की श्रेणी में रखता है। गांव–गांव तक पहुंची टीम : मप्र के 51 जिलों में सेवाएं सक्रिय हैं और इनका नेटवर्क सीधे गांवों तक फैला हुआ है। प्रदेश में कुल 12,417 प्राथमिक स्वास्थ्य परिचर्या केंद्र इस व्यवस्था से जुड़े हैं, जिनके जरिए गंभीर और अंतिम चरण के रोगियों तक राहत पहुंचाई जा रही है। ग्रामीण स्तर पर एसएचसी (सब हेल्थ सेंटर) में तैनात सीएचओ (कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर) की संख्या 9,950 है, जो मरीजों की शुरुआती जांच, दवाओं और परामर्श का काम संभालते हैं। वहीं एसएचसी और पीएचसी (प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र) में कुल 13,410 एएनएम (ऑक्ज़िलरी नर्स मिडवाइफ) तैनात हैं, जो घर-घर जाकर देखभाल, दवा और मरीज की स्थिति पर नजर रखती हैं। वित्तीय वर्ष 2023-24 से अक्टूबर 2025 तक मध्यप्रदेश में कुल 4,70,954 रोगियों ने अस्पताल पहुंचकर इलाज और परामर्श लिया, जिन्हें बिना भर्ती किए दवाएं, परामर्श और दर्द से राहत दी गई। इसी अवधि में 1,36,316 रोगियों को अस्पताल में भर्ती रहकर इलाज और देखभाल मिली, क्योंकि उनकी स्थिति गंभीर थी और लगातार निगरानी की आवश्यकता थी। वर्ष 2023-24 में 1,51,209 रोगियों ने अस्पताल पहुंचकर इलाज लिया, जबकि 74,714 मरीजों को भर्ती कर देखभाल दी गई। 2024-25 में अस्पताल आने वाले रोगियों की संख्या बढ़कर 2,17,403 हो गई, लेकिन भर्ती मरीज घटकर 40,532 रह गए। वहीं 2025-26 में अक्टूबर तक 1,02,342 रोगियों ने अस्पताल पहुंचकर इलाज लिया और 21,070 मरीजों को भर्ती कर देखभाल दी गई।


